कोलाघाट फूल बाजार के निजीकरण विरोध में किसानों का खड़गपुर में प्रदर्शन
खड़गपुर, 25 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के दूसरे सबसे बड़े कोलाघाट फूल बाजार को रेलवे द्वारा निजीकरण किए जाने की पहल के विरोध में गुरुवार को सैकड़ों फूल उत्पादकों और व्यापारियों ने खड़गपुर स्थित डीआरएम कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बाजार में सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ आधुनिक “फूल हब” के निर्माण तथा ट्रेनों के विलंब से चलने की समस्या के समाधान की मांग उठाई।
कोलाघाट फूल बाजार संचालन समिति के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में करीब 500 से अधिक फूल उत्पादक और व्यापारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारी खड़गपुर रेलवे स्टेशन से डीआरएम कार्यालय तक रैली निकालते हुए पहुंचे और मुख्य द्वार पर सभा आयोजित की।
सभा को संचालन समिति के सलाहकार एवं अखिल बंगाल फूल उत्पादक एवं फूल व्यवसायी समिति के महासचिव नारायण चंद्र नायक, अध्यक्ष देवव्रत कोले, संयुक्त सचिव दिलीप प्रमाणिक समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। आंदोलन को समर्थन देते हुए पूर्व एवं पश्चिम मेदिनीपुर डिस्ट्रिक्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सचिव चंदन राय तथा समाजसेवी सुरंजन महापात्र ने भी अपनी बात रखी।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण पूर्व रेलवे के खड़गपुर मंडल के डीआरएम ललित मोहन पांडे से मुलाकात कर छह सूत्री मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। इसी प्रकार वरिष्ठ मंडलीय अभियंता (पूर्व) संतोष कुमार के कार्यालय में भी ज्ञापन दिया गया।
प्रमुख मांगों में रेलवे द्वारा प्रतिदिन बाजार टिकट वसूली के लिए निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रद्द करना, बाजार में शेड, पक्का फर्श, पेयजल, शौचालय और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना, बाजार के पास आधुनिक फूल हब का निर्माण, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना, कोलाघाट स्टेशन पर विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित करना तथा दक्षिण पूर्व रेलवे की ट्रेनों का समय सारिणी के अनुसार संचालन शामिल है।
नारायण चंद्र नायक ने आरोप लगाया कि रेलवे विभाग वर्तमान में किसानों से प्रतिदिन 10 रुपये तथा व्यापारियों से 25 से 42 रुपये तक शुल्क वसूलता है, लेकिन बाजार में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। उन्होंने कहा कि निजीकरण लागू होने पर छोटे फूल उत्पादक और व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राज्य बजट में कोलाघाट में “फूल हब” निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की घोषणा हुई है। ऐसे समय बाजार के निजीकरण की कोशिश उचित नहीं है।
आंदोलनकारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि रेलवे प्रशासन शीघ्र आवश्यक कदम नहीं उठाता, तो फूल उत्पादक और व्यापारी बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

