चुनाव 26 : आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट पर तीन नाम कृष्णेंदु बना चर्चा का विषय
आसनसोल, 07 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट पर एक दिलचस्प और असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान एक ही नाम के तीन उम्मीदवार सामने आ गए। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों को कुछ समय के लिए उलझन में डाला, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है।
मंगलवार को आसनसोल एसडीएम कार्यालय में स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही थी। विभिन्न उम्मीदवार अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान जब अधिकारियों ने नाम पुकारना शुरू किया, तो शुरुआत में सब सामान्य लगा, लेकिन स्थिति तब चौंकाने वाली हो गई जब एक के बाद एक ‘कृष्णेंदु’ नाम सामने आने लगा। पहले ‘कृष्णेंदु मुखर्जी’ का नाम पुकारा गया, उसके बाद ‘कृष्णेंदु चटर्जी’ और अंत में भाजपा उम्मीदवार ‘कृष्णेंदु मुखर्जी’। एक ही सीट पर एक जैसे नाम वाले तीन उम्मीदवारों के होने से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए और कुछ समय के लिए अधिकारियों को भी स्पष्ट करना पड़ा कि कौन किस पार्टी या निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद अन्य उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच चर्चाएं शुरू हो गईं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कई लोगों का मानना है कि यह मतदाताओं को भ्रमित करने की एक रणनीति हो सकती है, जिससे वोटों का बंटवारा किया जा सके।
इस मामले पर भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कल्ला स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोधी दल भाजपा से घबराए हुए हैं और जानबूझकर उनके नाम से मिलते-जुलते उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं ताकि मतदाताओं को भ्रमित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि आसनसोल उत्तर में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से विपक्ष में भय का माहौल है और इसी कारण इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। व्यंग्यात्मक लहजे में उन्होंने यह भी कहा कि वह कई ‘कृष्णेंदु’ नाम के लोगों को जानते हैं और अगर जरूरत पड़ी तो और भी उम्मीदवार खड़े हो सकते हैं।
इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, हालांकि चुनावी नियमों के अनुसार एक ही नाम के कई उम्मीदवारों का होना अवैध नहीं है, बशर्ते उनके सभी दस्तावेज सही हों।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी देखने को मिल चुकी हैं, जहां प्रमुख उम्मीदवारों के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले उम्मीदवार खड़े किए जाते हैं ताकि मतदाताओं में भ्रम पैदा किया जा सके।
स्थानीय मतदाताओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सामान्य चुनावी रणनीति बता रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

