खड़गपुर में रंगों की धूम, सौहार्द के साथ मना होली उत्सव
खड़गपुर, 04 मार्च (हि. स.)। 'मिनी इंडिया' के नाम से विख्यात रेल नगरी खड़गपुर में रंगों का पावन पर्व होली और दोल उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के संगम वाले इस शहर में सनातन संस्कृति की अटूट जड़ें एक बार फिर दिखाई दी। जहां एक ओर सड़कों पर बच्चे अपनी टोलियों के साथ पिचकारियों से एक-दूसरे को सराबोर करते नजर आए, वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों की टोलियों ने फाग गाकर और हंसी-ठिठोली करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
आधुनिकता के रंग में रंगे युवाओं का खासा उत्साह दिखा, जो शहर के विभिन्न होटलों में पश्चिमी धुनों और डीजे की थाप पर रंगों के खुमार में झूमते नजर आए। आस्था और परंपरा का अनूठा संगम मंदिरों में भी देखने को मिला। विशेष रूप से श्री श्याम बाबा मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा का आशीर्वाद लिया और कीर्तन की धुन पर भाव-विभोर होकर नृत्य किया।
बंगाली सभ्यता की अनमोल धरोहर 'डोल' की खुशी में लोग एक-दूसरे का 'मिठाई खिलाते' कराते दिखे।
इंदा, गोलबाजार, मालांचा, खरीदा, अयमा और झपेटापुर से लेकर झुग्गी-झोपड़ियों तक, रंगों का यह त्यौहार अपने आप में संपूर्ण और शांत रहा। पूरे शहर में प्रशासनिक मुस्तैदी साफ तौर पर देखी गई, जहां पुलिस बल बाइक पर गश्त करते दिखे।
इसी बीच विभिन्न सामाजिक संस्थाएं भी अपनी जिम्मेदारी निभाती दिखीं, जिन्होंने जगह-जगह डेस्क लगाकर सामाजिक समरसता की मिसाल पेश की।
दिलचस्प बात यह रही कि लोकसभा चुनाव नजदीक होने के बावजूद सड़कों पर राजनीतिक गहमागहमी और कार्यकर्ताओं के जत्थे नदारद रहे। खड़गपुर ने एक बार फिर साबित किया कि भिन्न-भिन्न भाषा-भाषियों के बावजूद यहां का सनातन संस्कृति और एकता अटूट है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

