कांथी और डोमकल के तृणमूल के कोर कमेटी फैसले पर कार्यकर्ताओं में प्रतिक्रिया
मेदिनीपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस द्वारा कांथी और मुर्शिदाबाद के डोमकल में कोर कमेटी मॉडल लागू करने का फैसला अब पार्टी के भीतर ही चर्चा और असंतोष का कारण बनता नजर आ रहा है। मंगलवार शाम को नई सांगठनिक सूची जारी होने के बाद बुधवार को यह निर्णय पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच रोष और व्यापक बहस का विषय बन गया है।
शुभेंदु अधिकारी के प्रभाव वाले माने जाने वाले कांथी क्षेत्र में पार्टी ने कांथी-एक सांगठनिक ब्लॉक और कांथी टाउन ब्लॉक में अध्यक्ष पद खाली रखते हुए चार-चार सदस्यों की कोर कमेटी का गठन किया है। कांथी-एक ब्लॉक की कोर कमेटी में नीलाद्री मायती, प्रकाश मंडल, रामगोबिंद दास और सुनीत पटनायक को शामिल किया गया है। वहीं कांथी टाउन ब्लॉक की जिम्मेदारी आलम अली खान, रत्नदीप मन्ना, सुरजीत नायक और तनुश्री चक्रवर्ती भट्टाचार्य को संयुक्त रूप से सौंपी गई है।
इसी तरह मुर्शिदाबाद जिले के डोमकल ब्लॉक में भी अध्यक्ष पद को समाप्त कर तीन सदस्यीय कोर कमेटी बनाई गई है। डोमकल ब्लॉक की कमेटी में बसीर मुल्ला, सामसुज्जौहा विश्वास और ताजिमुद्दीन खान को शामिल किया गया है, जबकि डोमकल टाउन ब्लॉक की जिम्मेदारी अब्दुस समद विश्वास, कमरुज्जमां मंडल और शमीम शेख को दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह से ही पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी और सवाल-जवाब का दौर शुरू हो गया। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि अध्यक्ष पद हटाए जाने से संगठन में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जबकि कुछ इसे वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि जिला नेतृत्व का दावा है कि कोर कमेटी मॉडल से गुटबाजी पर रोक लगेगी और संगठनात्मक निर्णय अधिक सामूहिक और प्रभावी होंगे। नेतृत्व का यह भी कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह चुनावी रणनीति के तहत लागू की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस उन इलाकों में यह मॉडल अपना रही है, जहां संगठन के भीतर असंतोष या विपक्ष, खासकर भाजपा और शुभेंदु अधिकारी का प्रभाव मजबूत माना जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

