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कामदुनी दुष्कर्म-हत्या मामले में पीड़ित परिवार का सुप्रीम कोर्ट में विरोध नहीं करेगी राज्य सरकार, कानूनी सहायता भी देगी - मुख्यमंत्री

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कामदुनी दुष्कर्म-हत्या मामले में पीड़ित परिवार का सुप्रीम कोर्ट में विरोध नहीं करेगी राज्य सरकार, कानूनी सहायता भी देगी - मुख्यमंत्री


कोलकाता, 11 जुलाई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2013 के चर्चित कामदुनी सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में राज्य सरकार अब उच्चतम न्यायालय में पीड़ित परिवार का विरोध नहीं करेगी। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार को कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी और उनकी ओर से पैरवी के लिए सरकारी वकीलों की व्यवस्था की जाएगी।

बारुईपुर में दुष्कर्म-हत्या की शिकार नाबालिग के परिवार और घटना के बाद भीड़ की हिंसा में मारे गए युवक के परिजनों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि वह राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता को स्पष्ट निर्देश देंगे कि उच्चतम न्यायालय में सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय में 16 लोक अभियोजकों को बदला गया था। बाद में पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक राज्य सरकार पीड़ित परिवार का विरोध करती रही, लेकिन उनकी सरकार ऐसा नहीं करेगी और न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कानूनी सहयोग देगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में उत्तर 24 परगना जिले के कामदुनी में घर लौट रही एक कॉलेज छात्रा का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था। इस घटना के बाद पूरे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक आक्रोश फैल गया था।

इस मामले में वर्ष 2016 में बारासात की अदालत ने तीन दोषियों को फांसी और तीन अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने दो दोषियों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया, एक दोषी को बरी कर दिया तथा अन्य दोषियों की सजा में भी संशोधन किया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को सामान्य घटना या प्रेम प्रसंग बताकर टालने की कोशिश नहीं की जाएगी और न ही केवल आर्थिक सहायता को न्याय का विकल्प माना जाएगा। उनका कहना था कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिले और न्याय की प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।

गौरतलब है कि कामदुनी घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गांव का दौरा किया था, जहां उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। उस समय उनके कुछ बयानों को लेकर भी राजनीतिक विवाद पैदा हुआ था।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर