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एसआईआर ‘तार्किक विसंगति’ मामलों की न्यायिक प्रक्रिया शुरू

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एसआईआर ‘तार्किक विसंगति’ मामलों की न्यायिक प्रक्रिया शुरू


कोलकाता, 23 फरवरी (हि.स.)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान ‘तार्किक विसंगति’ श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं के दस्तावेजों की न्यायिक जांच प्रक्रिया सोमवार से आरंभ हो गई है। शीर्ष न्यायालय के हालिया निर्देश के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है। न्यायिक अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होगा।

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि प्रारंभिक चरण में लगभग 150 सत्र न्यायाधीशों को इस कार्य में लगाया गया है। कुल मिलाकर करीब 250 न्यायिक अधिकारियों को दस्तावेजों के परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला स्तर पर तीन सदस्यीय समितियां करेंगी। प्रत्येक समिति में संबंधित जिला न्यायाधीश, जिला दंडाधिकारी (जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी होते हैं) तथा संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक शामिल रहेंगे।

नियुक्त न्यायिक अधिकारियों में से लगभग 100 अधिकारी एनडीपीएस अधिनियम तथा बालकों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण संबंधी अधिनियम के अंतर्गत गठित विशेष न्यायालयों में कार्यरत हैं। शेष अन्य सत्र न्यायालयों के न्यायाधीश हैं।

रविवार को कोलकाता में न्यायिक अधिकारियों और भारत निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधियों के बीच बैठक आयोजित की गई, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि वे केवल आयोग द्वारा निर्धारित 13 प्रकार के पहचान पत्रों को ही मान्य करेंगे।

इस विषय पर राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी अन्य पहचान पत्रों को भी स्वीकार किया जाना चाहिए।

वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। जिन मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया है, उन्हें इस सूची से बाहर रखा जाएगा। जांच पूर्ण होने के बाद अनुपूरक सूची जारी की जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि लगभग 50 लाख दस्तावेज न्यायिक परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, ऐसे में निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अधिसूचना जारी कर नौ मार्च तक राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों की छुट्टियां निरस्त कर दी हैं। आपात चिकित्सकीय अवकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों को तत्काल कार्य पर लौटने का निर्देश दिया गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर