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जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘ऋषि अरविंद विश्वविद्यालय’ करने की मांग

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जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘ऋषि अरविंद विश्वविद्यालय’ करने की मांग


कोलकाता, 04 सितंबर (हि.स.)।

जादवपुर विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘ऋषि अरविंद विश्वविद्यालय’ रखने की मांग जादवपुर की भाजपा विधायक शर्वरी मुखर्जी ने की है। उन्होंने विश्वविद्यालय को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य और आदर्श को लेकर इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी, आज उसके विपरीत गतिविधियों और विचारों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय बंगाल की शिक्षा और संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पहचान है, इसलिए विश्वविद्यालय की गरिमा और उसके मूल उद्देश्यों की रक्षा की जानी चाहिए। शर्वरी मुखर्जी ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर को लेकर समय-समय पर राष्ट्रवाद और देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी शिक्षण संस्थान में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भाजपा विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय के नाम को बदलकर महान दार्शनिक, स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी विचारक ऋषि अरविंद के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे विश्वविद्यालय की पहचान भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और उच्च शिक्षा के मूल्यों से और अधिक जुड़ सकेगी।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्यपाल के समक्ष एक ज्ञापन दिया जाएगा और विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों को लेकर उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा।

शर्वरी मुखर्जी ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष या विद्यार्थियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन विचारों और गतिविधियों के खिलाफ है, जिन्हें वह देश और राष्ट्रवाद के हितों के प्रतिकूल मानती हैं। उन्होंने कहा कि देश और राष्ट्र के सम्मान के खिलाफ किसी भी प्रकार की गतिविधि का विरोध किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जादवपुर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को बनाए रखना जरूरी है और यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित संस्थाओं से परिसर में अनुशासन और शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की अपील की।

भाजपा विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन और अन्य मुद्दों को लेकर आगे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखी जाएगी तथा आवश्यक होने पर राज्यपाल और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा