आसनसोल नगर निगम में बदलाव के संकेत, जितेंद्र तिवारी के बयान से तेज हुई सियासी चर्चा
आसनसोल, 07 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद अब जिलों की राजनीति में तेजी से नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के बाद भाजपा नेताओं के घरों पर समर्थकों, स्थानीय लोगों और यहां तक कि विरोधी दलों के नेताओं का पहुंचना लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच पांडेश्वर से नव निर्वाचित भाजपा विधायक और आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी का एक बयान गुरुवार को पूरे जिले में सियासी चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मैं जिस झंडे पर विश्वास करता हूं और जिस झंडे को लेकर काम करता हूं, वही झंडा जल्द नगर निगम में जाएगा।
उनके इस बयान को आसनसोल नगर निगम में बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
गुरुवार को आसनसोल स्थित जितेंद्र तिवारी के आवास पर सुबह से ही समर्थकों, भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भीड़ लगी रही। लोग फूल-माला, मिठाई और गुलदस्ते लेकर पहुंचे और उन्हें चुनावी जीत की बधाई दी।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस समय शुरू हुई जब आसनसोल नगर निगम के वार्ड नंबर 19 की तृणमूल पार्षद उषा रजक अपने पति के साथ जितेंद्र तिवारी के घर पहुंचीं। उन्होंने विधायक को जीत की शुभकामनाएं दीं और कुछ देर बातचीत भी की।
इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए। मीडिया से बातचीत के दौरान जितेंद्र तिवारी ने कहा कि जब उन्होंने आसनसोल नगर निगम छोड़ा था, उसी समय उन्होंने संकेत दिया था कि वह दोबारा वापसी करेंगे।
उन्होंने कहा कि नगर निगम में बदलाव तय है। आने वाले समय में वहां झंडे का परिवर्तन होगा। मेयर कोई भी बने, लेकिन बोर्ड भाजपा का होगा।
उनके इस बयान को भाजपा की नगर निगम पर नजर और संगठनात्मक आत्मविश्वास के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद जिले में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है। कई स्थानीय नेता और जनप्रतिनिधि अब भाजपा नेतृत्व के साथ संपर्क बढ़ाते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले समय में नगर निगम में भी राजनीतिक समीकरण बदले, तो आसनसोल की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
जितेंद्र तिवारी का “झंडा बदलने” वाला बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भाजपा समर्थक इसे “परिवर्तन की शुरुआत” बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति कह रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

