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अणुव्रत मंडल पर जमीन कब्जे का आरोप, मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे पूर्णदास बाउल

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अणुव्रत मंडल पर जमीन कब्जे का आरोप, मुख्यमंत्री के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे पूर्णदास बाउल


कोलकाता, 09 सितंबर (हि. स.)। बीरभूम के इलमबाजार और शांतिनिकेतन में कब्जाई गई जमीन वापस दिलाने की मांग को लेकर पद्मश्री से सम्मानित बाउल सम्राट पूर्णदास बाउल और उनके बेटे दिव्येंदु दास बाउल बुधवार को सॉल्टलेक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के ‘जनता दरबार’ में पहुंचे। उन्होंने दोनों जमीनों को कब्जामुक्त कराकर वापस दिलाने की मांग की।

पूर्णदास बाउल के परिवार का आरोप है कि इलमबाजार के कामारपाड़ा मौजा में 1977 में खरीदी गई उनकी 10 बीघे से अधिक जमीन में से करीब चार बीघे पर सुकुल टुडू नामक व्यक्ति ने 2006 में कब्जा कर लिया। वह तत्कालीन तृणमूल नेता अणुव्रत मंडल का बेहद खास रहा है। जमीन का पार्ट नंबर बदलने का भी आरोप लगाया गया है। परिवार का यह भी दावा है कि शांतिनिकेतन में पूर्णदास बाउल के पिता को रवींद्रनाथ ठाकुर ने अखाड़ा बनाने के लिए जमीन दी थी। आरोप है कि उस जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है।

दिव्येंदु दास बाउल के मुताबिक, मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने दोनों जमीनों को वापस दिलाने की मांग रखी। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उनके सामने ही बीरभूम के जिलाधिकारी को फोन किया और शांतिनिकेतन तथा इलमबाजार की जमीन वापस दिलाने का निर्देश दिया।

दिव्येंदु के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि आप लोगों को आने की जरूरत नहीं थी। मुझे इस मामले की जानकारी है। एक बार फोन कर देते, मैं खुद जिलाधिकारी से बात कर लेता।

पूर्णदास बाउल और उनके बेटे ने इससे पहले 18 अगस्त को बीरभूम जिलाधिकारी कार्यालय में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। उस समय दिव्येंदु ने जमीन पर कब्जे में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुव्रत मंडल और पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा की कथित भूमिका का आरोप लगाया था। उनका दावा था कि सुकुल टुडू दोनों नेताओं के करीबी हैं।

हालांकि, बुधवार को मुख्यमंत्री के जनता दरबार में दिव्येंदु ने किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ शिकायत करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मैं किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ शिकायत करने नहीं आया हूं और न ही ऐसा चाहता हूं। हमारी सिर्फ यही मांग है कि हमारी जमीन हमें वापस मिल जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर