home page

चुनाव 26 : जामुड़िया विधानसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला

 | 

आसनसोल, 01 अप्रैल (हि. स.)। जामुड़िया विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। यह सीट वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई थी और शुरुआती दौर में यहां की जनता ने किसी एक पार्टी को स्थायी समर्थन नहीं दिया। 1957 से 1972 तक हुए चुनावों में हर बार अलग-अलग उम्मीदवारों को जीत मिलती रही, जिससे यह साफ था कि मतदाता किसी एक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़े थे।

1957 में यह सीट दो सदस्यीय थी, जिसमें कांग्रेस के बैद्यनाथ मंडल और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के अमरेंद्र मंडल संयुक्त रूप से विधायक बने। वर्ष 1962 में यह सीट एक सदस्यीय हो गई और अमरेंद्र मंडल ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद 1967 से 1972 तक इस सीट पर एक ही परिवार के बीच दिलचस्प राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला। अमरेंद्र मंडल, तीन कौड़ी मंडल और बाद में उनके चचेरे भाई दुर्गादास मंडल के बीच चुनावी टक्कर होती रही, जिसमें जीत-हार का सिलसिला लगातार चलता रहा। इस दौर में सीट कई बार हाथ बदलती रही।

वर्ष 1977 के बाद इस सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया मार्क्सिस्ट (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा ने यहां मजबूत पकड़ बना ली। हराधन राय ने 1977 में जीत दर्ज कर इस सिलसिले की शुरुआत की और इसके बाद 1982, 1987 और 1991 में भी लगातार जीत हासिल की। आने वाले वर्षों में भी यह सीट वाम दलों के कब्जे में रही और 2016 तक लगातार नौ बार यहां वाम मोर्चा का परचम लहराता रहा, जिसके कारण जामुड़िया को “लाल दुर्ग” कहा जाने लगा। 2011 और 2016 के चुनाव में जहांआरा खान यहां से विधायक बनीं।

वर्ष 2021 के चुनाव में इस लंबे राजनीतिक समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिला। हरेराम सिंह ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करते हुए वाम मोर्चा के इस मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। यह जीत कई मायनों में खास रही, क्योंकि पहली बार किसी हिंदी भाषी नेता ने इस सीट पर विजय हासिल की। उनकी इस जीत की सराहना ममता बनर्जी ने भी की थी।

2021 के चुनाव परिणाम में हरे राम सिंह को 71 हजार 102 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार तापस राय को 62 हजार 951 वोट प्राप्त हुए और वाम दल के उम्मीदवार आईसी घोष को 24 हजार 818 वोट मिले। इस परिणाम ने साफ कर दिया कि जामुड़िया अब एकतरफा सीट नहीं रही, बल्कि यहां मुकाबला बहुकोणीय हो चुका है।

वर्तमान में जामुड़िया विधानसभा सीट पर फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज है। तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर हरे राम सिंह पर भरोसा जताया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस भी मैदान में हैं। यह सीट अब स्थायी गढ़ की बजाय एक प्रतिस्पर्धी और निर्णायक सीट बन चुकी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा