जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में दीवार पर फिर लिखे गये वामपंथी नारे
कोलकाता, 31 अगस्त (हि.स.)।
जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर की जिस दीवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद सफेद रंग से पोतकर विआमपंथी नारों को मिटाया गया था, उसी दीवार पर 24 घंटे के भीतर एक बार फिर नीले रंग से कार्ल मार्क्स की उक्ति लिखे जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
एबीवीपी छात्र संगठन का आरोप है कि यह नया दीवार लेखन नक्सलपंथियों द्वारा किया गया है। हालांकि, मंत्री दिलीप घोष का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में सभी को दीवार पर लिखने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्ल मार्क्स के विचार या उनकी नीतियां भारत में प्रतिबंधित नहीं हैं, लेकिन देश विरोधी नारे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
दिलीप घोष ने कहा कि सरकार ने जादवपुर में उन नारों को हटाने की जरूरत महसूस की, जिन्हें देश विरोधी माना गया। उन्होंने कहा कि जो लोग लंबे समय से परिसर को अपने कब्जे में लेकर इसे कथित रूप से देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र बनाना चाहते थे, उन्हें अब स्पष्ट संदेश दिया गया है कि ऐसा नहीं चलेगा।
मंत्री ने कहा, “लोकतांत्रिक देश में दीवार लेखन हर कोई कर सकता है और कार्ल मार्क्स के विचार लिखना प्रतिबंधित नहीं है। लेकिन भारत के खिलाफ चुनौती देना या देश की एकता और अखंडता को चुनौती देना भारत सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।”
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जादवपुर विश्वविद्यालय को लेकर कई बार कड़ा रुख अपना चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जादवपुर में राष्ट्रवाद की स्थापना की जाएगी और देश विरोधी नारे किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा था कि वह समस्या और उसका समाधान दोनों जानते हैं। उन्होंने दावा किया था कि एबीवीपी ने दिल्ली के जेएनयू और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय जैसे परिसरों में बदलाव लाने का काम किया है और अब जादवपुर की बारी है।
उन्होंने जादवपुर परिसर में लिखे गए कुछ नारों पर भी आपत्ति जताई थी और कहा था कि भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने वाली किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जादवपुर की दीवार पर एक बार फिर कार्ल मार्क्स की उक्ति लिखे जाने के बाद इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच नई बहस शुरू हो गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

