जादवपुर विश्वविद्यालय की जांच समिति के अध्यक्ष बनने से शुभशंकर सरकार का इनकार
कोलकाता, 23 अगस्त (हि.स.)। जादवपुर विश्वविद्यालय में हाल में हुई घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभालने से नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर शुभशंकर सरकार ने इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार, 22 अगस्त को उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को ईमेल भेजकर अपने निर्णय की जानकारी दी।
शुभशंकर सरकार के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी लेने से इनकार के बाद जांच समिति के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि अध्यक्ष के बिना समिति निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना काम शुरू कर पाएगी या नहीं।
जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में गत 19 और 20 अगस्त को हुई कई घटनाओं की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक जांच समिति गठित की थी। इस समिति के अध्यक्ष के रूप में शुभशंकर सरकार के नाम की घोषणा की गई थी। समिति में बाबा साहेब आंबेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति अरुणाशिस गोस्वामी और प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक सौमेंदु चट्टोपाध्याय को भी शामिल किया गया था।
इसी बीच शनिवार को जादवपुर विश्वविद्यालय के शिक्षक संगठन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से शुभशंकर सरकार को जांच समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के निर्णय पर आपत्ति जताई गई। संगठन का आरोप है कि शिक्षक नियुक्ति से जुड़े विवाद में अतीत में शुभशंकर सरकार की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। संगठन की ओर से उन्हें जांच समिति के नेतृत्व से हटाने की मांग भी की गई।
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, शिक्षक संगठन की आपत्ति सार्वजनिक होने से पहले ही शुभशंकर सरकार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को ईमेल भेजकर जांच समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया था। ऐसे में उनके निर्णय का शिक्षक संगठन की आपत्ति से कोई संबंध है या नहीं, इस बारे में फिलहाल निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
अब विश्वविद्यालय प्रबंधन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह जांच समिति के लिए नया अध्यक्ष नियुक्त करेगा या समिति के पूरे स्वरूप में बदलाव किया जाएगा। जांच शुरू होने से पहले ही अध्यक्ष द्वारा जिम्मेदारी लेने से इनकार किए जाने के कारण जादवपुर विश्वविद्यालय की जांच प्रक्रिया एक बार फिर अनिश्चितता में पड़ गई है। शिक्षा जगत के एक वर्ग का भी यही मानना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

