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जादवपुर में हिंसा पर सवाल, सीसीटीवी फुटेज और सुरक्षा को लेकर घमासान

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जादवपुर में हिंसा पर सवाल, सीसीटीवी फुटेज और सुरक्षा को लेकर घमासान


कोलकाता, 24 अगस्त (हि. स.)। जादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में 20 अगस्त की देर रात हुई हिंसा और तोड़फोड़ को लेकर सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच हुई बैठक में कई सवाल उठे। छात्र कल्याण बोर्ड के साथ बैठक में छात्रों के एक वर्ग ने पूछा कि सीसी कैमरे के फुटेज में गणित के प्रोफेसर बुद्धदेव साव दिखाई देने के बावजूद उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की गई।

छात्रों ने कहा कि देर रात बाहरी लोगों ने परिसर और छात्रावास में जिस तरह हमला किया, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इसी दौरान अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े प्रोफेसर बुद्धदेव साव का मुद्दा भी उठाया गया।

छात्रों के अनुसार, 22 अगस्त को आरोप लगाया गया था कि बुद्धदेव साव घटना के प्रत्यक्षदर्शी थे। सीसी कैमरे के फुटेज में उन्हें चार नंबर फाटक के पास खड़ा देखा गया था। आरोप है कि उन्होंने कुछ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों से बातचीत भी की थी। छात्रों ने सवाल किया कि पर्याप्त प्रमाण होने के बावजूद हिंसा के लिए कथित रूप से उकसाने के आरोप में उनके खिलाफ शिकायत क्यों नहीं दर्ज की गई।

जादवपुर थाने की पुलिस सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में लगे सभी सीसी कैमरों के फुटेज लेने पहुंची। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शनिवार को बाहरी लोगों के खिलाफ परिसर में हमला करने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

इस बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने परिसर की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की। वहीं, वामपंथी कर्मचारी संगठन ‘जादवपुर विश्वविद्यालय कर्मचारी संसद’ ने कहा कि पुलिस चौकी विश्वविद्यालय की सीमा के भीतर नहीं, बल्कि बाहर होनी चाहिए। संगठन ने सोमवार को परिसर में विरोध मार्च भी निकाला।

महासंघ ने 19 अगस्त को आयोजित सामान्य सभा के आयोजकों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि सीसी कैमरे का फुटेज पुलिस को सौंपे जाने से पहले समाचार माध्यमों तक कैसे पहुंचा। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई।

बुद्धदेव साउ ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सलीमबक्स मंडल पर आंतरिक सूचनाएं बाहर पहुंचाने का आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर मामले में फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार, घटना की सूचना पाकर वह मौके पर पहुंचे थे और विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर में रहने के कारण सबसे पहले पहुंचने वालों में थे।

उधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जादवपुर में प्रतीक तोड़े जाने और कथित देशविरोधी पोस्टरों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।

हालांकि इस संबंध में संगठन की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। राज्य के विद्यालय शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने भी परिसर में लगे पोस्टरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता