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सेल आईएसपी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन

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सेल आईएसपी में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन


आसनसोल, 28 मार्च (हि. स.)। इस्को इस्पात संयंत्र द्वारा बर्नपुर, में “अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन पूरे सेल में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और भारत सरकार की राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में राजभाषा के क्षेत्र में इस स्तर का पहला व्यापक सम्मेलन है, जिसने प्रशासन, तकनीक और संस्कृति के क्षेत्र में हिंदी भाषा के महत्व को विशेष रूप से उजागर किया।

सम्मेलन का उद्घाटन कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) राजकुमार सिन्हा द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में हिंदी को देश की विविधता को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी बताया और प्रशासन एवं संस्कृति में इसके महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने एआई एवं डिजिटल तकनीकों के माध्यम से राजभाषा के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत कार्यकारी कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) उमेंद्र पाल सिंह के स्वागत वक्तव्य से हुई। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का सम्मेलन पहली बार आयोजित किया गया है और यह आईएसपी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि संयंत्र में प्रतिवर्ष 400 से अधिक राजभाषा कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, और मासिक ऑनलाइन राजभाषा क्विज़ के माध्यम से कार्मिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। इसके अतिरिक्त, राजभाषा नियम पुस्तिका के निर्माण एवं नराकास, बर्नपुर–आसनसोल की अध्यक्षता के माध्यम से राजभाषा कार्यान्वयन को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है।

सम्मेलन में विभिन्न सत्रों में देशभर के प्रख्यात वक्ताओं ने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए।

प्रो. राकेश उपाध्याय (भारतीय जन संचार संस्थान) ने डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार की भूमिका पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया न केवल सूचना और समाचार के प्रचार का माध्यम है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का शक्तिशाली साधन भी है।

डॉ. विचित्रसेन गुप्त, उप निदेशक (कार्यान्वयन) पूर्व क्षेत्र ने भारत सरकार की राजभाषा नीति की प्रमुख विशेषताओं और उद्देश्यों को साझा किया। उन्होंने हिंदी के प्रशासनिक कार्यान्वयन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पुरस्कार योजनाओं की जानकारी दी और बताया कि विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमित कार्यशालाएं और निगरानी प्रक्रियाएं संचालित की जाती हैं।

डॉ. चंदा गुप्ता ने तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल टूल्स का उपयोग राजभाषा कार्यान्वयन को अधिक प्रभावी और सरल बनाने में किस प्रकार किया जा सकता है। उन्होंने दस्तावेज़ अनुवाद, भाषा सुधार, ऑनलाइन प्रशिक्षण और ई-गवर्नेंस प्लेटफ़ॉर्म के उदाहरण प्रस्तुत किए।

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक श्री दीपक दुआ ने बताया कि चलचित्र और डिजिटल कंटेंट हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में अत्यंत प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने फिल्मों के उदाहरण देकर स्पष्ट किया कि हिंदी संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को लोगों तक पहुंचाने का भी शक्तिशाली साधन है।

इस अवसर पर इस्पात मंत्रालय से संयुक्त निदेशक (राजभाषा) श्री आनंद भोई और सहायक निदेशक श्री चंद्रेश मीणा उपस्थित थे। साथ ही, उप-महानिरीक्षक, केंद्रीय सुरक्षा बल, एल. के. हाकिप भी विशेष रूप से उपस्थित थे। इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रमों, सेल के विभिन्न संयंत्रों और इकाइयों से आए राजभाषा अधिकारियों, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बर्नपुर-आसनसोल सदस्य कार्यालयों से तथा देशभर से राजभाषा से जुड़े अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन) जितेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा