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शालबनी में आईएसएफ ने बदला उम्मीदवार

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शालबनी में आईएसएफ ने बदला उम्मीदवार


मेदिनीपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम मेदिनीपुर जिले की शालबनी विधानसभा सीट पर वाम मोर्चा-आईएसएफ गठबंधन के उम्मीदवार में अचानक बदलाव से राजनीतिक हलकों में भ्रम और असहजता की स्थिति बन गई है। पहले घोषित उम्मीदवार पीयूष हांसदा की जगह अब मोहन टुडू को उम्मीदवार बनाया गया है। इस फैसले से गठबंधन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी हैरानी देखी जा रही है।

गठबंधन समझौते के तहत शालबनी सीट आईएसएफ के खाते में गई थी। शुरुआत में पेशे से शिक्षक पीयूष हांसदा को उम्मीदवार घोषित किया गया था। इसके बाद गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने दीवार लेखन, पोस्टर-बैनर और घर-घर प्रचार शुरू कर दिया था। स्वयं पीयूष हांसदा भी मैदान में उतरकर प्रचार अभियान चला रहे थे।

लेकिन मंगलवार रात अचानक आईएसएफ ने उम्मीदवार बदलते हुए मोहन टुडू के नाम की घोषणा कर दी, जिसके बाद बुधवार को इस मुद्दे पर गठबंधन नेतृत्व के बीच चर्चा भी हुई।

अचानक हुए इस बदलाव से वाम मोर्चा के स्थानीय कार्यकर्ताओं को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले ही लोगों को गठबंधन के चुनाव चिह्न से परिचित कराने में काफी मेहनत लग रही थी। इसके अलावा लगभग 200 से अधिक दीवार लेखन पीयूष हांसदा के नाम से हो चुके हैं, जिन्हें हटाकर दोबारा प्रचार शुरू करना आसान नहीं है। साथ ही नए उम्मीदवार को कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच परिचित कराने में भी समय लगेगा।

नए उम्मीदवार मोहन टुडू पेशे से शिक्षक हैं। हालांकि एक राजनीतिक संघर्ष से जुड़े मामले में जेल जाने के बाद से वह निलंबित बताए जाते हैं। वर्ष 2003 में शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए मोहन टुडू वर्तमान में पश्चिम मेदिनीपुर जिला आईएसएफ के सह-अध्यक्ष हैं और उनका घर गड़बेता-एक ब्लॉक के सुखीशोल गांव में है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है और वह उसी अनुसार चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चार अप्रैल को वह नामांकन दाखिल करेंगे और उसके बाद प्रचार अभियान शुरू करेंगे।

इस मुद्दे पर शुक्रवार को माकपा की जिला सचिवमंडल के सदस्य सौगत पंडा ने कहा कि उम्मीदवार बदलने का कारण आईएसएफ ही बता सकता है। हालांकि इस फैसले से गठबंधन के कुछ दिन प्रचार के लिहाज से खराब हुए हैं और अब सभी कार्य फिर से शुरू करने होंगे।

दूसरी ओर आईएसएफ के जिलाध्यक्ष नाजिम खान का दावा है कि सत्तारूढ़ दल के दबाव के कारण पीयूष हांसदा ने उम्मीदवार बनने में अनिच्छा जताई। उन्होंने परिवार पर दबाव और डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया। हालांकि इस मामले में पीयूष हांसदा की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन या संदेश का जवाब नहीं दिया।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सुजय हाजरा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वाम-आईएसएफ गठबंधन का संगठन ही कमजोर है और प्रचार में लोगों की कमी के कारण इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता