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आईआईटी खड़गपुर के स्कूल कनेक्ट कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जाना विज्ञान और नवाचार

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आईआईटी खड़गपुर के स्कूल कनेक्ट कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जाना विज्ञान और नवाचार


आईआईटी खड़गपुर के स्कूल कनेक्ट कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जाना विज्ञान और नवाचार


आईआईटी खड़गपुर के स्कूल कनेक्ट कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जाना विज्ञान और नवाचार


खड़गपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने अपने प्लेटिनम जुबली समारोह के तहत शुक्रवार को ‘स्कूल कनेक्ट’ कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार की दुनिया से परिचित कराना तथा उनकी जिज्ञासा और रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देना था।

दिनभर चले कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आईआईटी खड़गपुर के शैक्षणिक और अनुसंधान वातावरण को करीब से देखा। उन्होंने उन्नत अनुसंधान सुविधाओं, नेहरू संग्रहालय और संस्थान परिसर का भ्रमण किया। विद्यार्थियों को नवंबर में होने वाली ‘क्रिएटएक्स@75’ प्रतियोगिता के बारे में भी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के प्रातःकालीन सत्र में आईआईएसईआर तिरुपति के निदेशक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। इसके बाद विशिष्ट अतिथि ऊपाली अपराजिता ने अपने विचार साझा किए। इस दौरान उनकी एक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

समापन सत्र में पश्चिम बंगाल सरकार के स्कूल शिक्षा एवं आवास तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और वस्त्र विभाग के मंत्री दीपक बर्मन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर आईआईटी खड़गपुर के इतिहास, उपलब्धियों, अनुसंधान, नवाचार और छात्र जीवन पर आधारित फिल्म दिखाई गई।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए दीपक बर्मन ने स्कूली शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित और भविष्य के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ‘एक विद्यार्थी, एक कौशल’ जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण से परिचित कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने स्कूली शिक्षा और आईआईटी के बीच की दूरी कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को उन्नत विज्ञान और नवाचार से परिचित कराने का काम केवल प्रवेश परीक्षा के बाद नहीं, बल्कि उनकी जिज्ञासा के शुरुआती दौर से ही शुरू होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और प्रश्न पूछने का साहस विद्यार्थियों की बड़ी ताकत है। उन्होंने प्रौद्योगिकी, मानवीय मार्गदर्शन और व्यावहारिक शिक्षा के समन्वय से स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने की जरूरत बताई।

निदेशक ने मानवीय शिक्षकों के सहयोग से चौबीसों घंटे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण सहायता, बंगाल एडवांस्ड टीचर मिशन, बंगाल इनोवेशन स्कूल्स नेटवर्क, क्रिएटएक्स@75 और टॉयकैथॉन बंगाल जैसी पहलों के साथ रोबोटिक्स, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और माइक्रोचिप किट से युक्त मेकर लैब विकसित करने की परिकल्पना भी साझा की।

आईआईटी खड़गपुर ने विद्यार्थियों के लिए विज्ञान और तकनीक आधारित शिक्षण किट तथा डिजिटल सहायता व्यवस्था विकसित करने की योजना बताई। प्रो. चक्रवर्ती ने संस्थान की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से परीक्षा और अंकों से आगे सोचने, निर्भीक होकर प्रश्न पूछने और वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता