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आईआईटी खड़गपुर ने मनाया 75वां स्थापना दिवस, विकसित भारत के निर्माण का लिया संकल्प

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आईआईटी खड़गपुर ने मनाया 75वां स्थापना दिवस, विकसित भारत के निर्माण का लिया संकल्प


आईआईटी खड़गपुर ने मनाया 75वां स्थापना दिवस, विकसित भारत के निर्माण का लिया संकल्प


खड़गपुर, 18 अगस्त (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने मंगलवार को अपना 75वां स्थापना दिवस मनाया। ऐतिहासिक हिजली बंदी शिविर से देश के प्रथम आईआईटी के रूप में शुरू हुई संस्थान की यात्रा के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने आईआईटी खड़गपुर को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रभाव के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में और बड़ी भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।

स्थापना दिवस समारोह में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन, पश्चिम बंगाल सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री डॉ. बाबूलाल चक्रवर्ती, नीति आयोग के सदस्य प्रो. गोवर्धन दास, स्काईरूट एयरोस्पेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदना समेत पूर्व छात्र, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर की सफलता का आकलन अब केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि संस्थान के कारण कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि संस्थान को केवल उत्कृष्टता का केंद्र नहीं, बल्कि ऐसा प्रभाव तंत्र विकसित करना होगा, जहां ज्ञान से समझ पैदा हो, शोध का लाभ वास्तविक समस्याओं के समाधान में मिले और प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक समाज तक पहुंचे।

उन्होंने संस्थान के भविष्य के विकास के लिए व्यक्ति को प्राथमिकता, शिक्षा में बदलाव, नवाचार एवं उद्यम, स्वास्थ्य और सस्ती उन्नत तकनीक तथा पूरे परिसर को प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने को प्रमुख आधार बताया। उन्होंने बताया कि संस्थान में 216 शिक्षकों का चयन और 123 नई नियुक्तियां हुई हैं। अगले छह महीनों में 300 से अधिक शोधोत्तर शोधार्थियों के जुड़ने की संभावना है।

विद्यार्थियों के समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के लिए ‘सेतु’ व्यवस्था विकसित की जा रही है। करीब 43.38 करोड़ रुपये की लागत से पांच हजार 345 वर्ग मीटर क्षेत्र में सेतु कल्याण केंद्र बनाया जाएगा। परिसर में सार्वजनिक ई-साइकिल सेवा, अनुप्रयोग आधारित बस सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बसों की मांग का अनुमान और वास्तविक समय में बस संचालन जैसी सुविधाएं भी शुरू की गईं।

निदेशक ने शिक्षा और शोध क्षेत्र में अंतर-आईआईटी विद्यार्थी आवागमन, ‘कृति’, दोहरी मुख्य विषय व्यवस्था, वैश्विक मानकों के अनुरूप मूल्यांकन और नए प्रवेश मार्गों की योजनाओं की जानकारी दी। बंगाली भाषा में आंकड़ा विज्ञान से संबंधित ऑनलाइन स्नातक पाठ्यक्रम तथा एक लाख महिलाओं को सशक्त बनाने की पहल पर भी जोर दिया गया।

कालीदास सभागार में ‘डिकोड लाइफ’ संवाद में श्रीश्री रविशंकर ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद करते हुए मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के संतुलन पर जोर दिया। मुख्य समारोह में डीएवी मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष प्रस्तुति दी।

इसके अलावा संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर, शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार, कर्मचारी उत्कृष्टता पुरस्कार, साहस एवं वीरता सम्मान, पूर्व छात्र अध्यक्ष प्रोफेसर पुरस्कार, जी. एस. सन्याल शिक्षक उत्कृष्टता पुरस्कार, राष्ट्रीय तकनीकी उन्नत शिक्षा कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर और शिक्षक फेलो पुरस्कार तथा परिवर्तनकारी परोपकार सम्मान भी दिए गए।

संस्थान में 25 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को भी स्थापना दिवस समारोह में सम्मानित किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता