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समुद्री बदलाव और प्राचीन व्यापार पर शोध करेगा आईआईटी खड़गपुर

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समुद्री बदलाव और प्राचीन व्यापार पर शोध करेगा आईआईटी खड़गपुर


खड़गपुर, 02 सितंबर (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर, मुंबई पत्तन (बंदरगाह) प्राधिकरण और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने एलिफेंटा द्वीप तथा भारत के पश्चिमी तट पर ऐतिहासिक जलवायु परिवर्तन और समुद्र के स्तर में हुए बदलावों के प्राचीन समुद्री व्यापार एवं मानव गतिविधियों पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए संयुक्त शोध परियोजना शुरू की है। परियोजना के लिए मुंबई पत्तन प्राधिकरण ने एक करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है।

आईआईटी खड़गपुर की ओर से बुधवार को जारी बयान के अनुसार, इस अंतरविषयक परियोजना में आधुनिक भू-विज्ञान तकनीकों के साथ पुरातात्विक प्रमाणों का अध्ययन किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से मध्यकाल तक के समुद्र स्तर, जलवायु परिस्थितियों और समुद्री गतिविधियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।

संस्थान के अनुसार, अध्ययन से पर्यावरणीय बदलाव, तटीय भूगोल, प्राचीन बस्तियों और समुद्री व्यापार मार्गों के बीच संबंधों को समझने में सहायता मिलेगी। परियोजना के तहत करीब एक हजार 500 से एक हजार वर्ष पूर्व के समय में जलवायु और समुद्र के स्तर में हुए बदलावों तथा समुद्री व्यापार पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। इससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के बढ़ते स्तर के संभावित प्रभावों को समझने में भी मदद मिलेगी।

जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल के अनुमान के अनुसार वर्ष दो हजार 100 तक विश्व स्तर पर समुद्र का जलस्तर 0.4 से 0.8 मीटर तक बढ़ सकता है। भारत के पश्चिमी तट पर यह वृद्धि एक मीटर तक पहुंचने की संभावना है। इससे मुंबई के निचले इलाकों के साथ एलिफेंटा द्वीप के आसपास के क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। द्वीप पर करीब एक हजार 500 वर्ष पुरानी भगवान शिव की प्रसिद्ध शैल-कट गुफाएं हैं, जिन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल किया गया है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अभिजीत अंबेकर के नेतृत्व में हाल में हुई खुदाई में एलिफेंटा द्वीप पर व्यापक मानव गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं। पुरातत्वविदों को 165 वर्ग मीटर क्षेत्रफल और आठ मीटर गहरे विशाल आयताकार जलाशय के अवशेष मिले हैं। यह जलाशय सीढ़ीनुमा संरचना से जुड़ा था। इससे उस समय पानी के संरक्षण की उन्नत व्यवस्था होने के संकेत मिलते हैं।

खुदाई में बड़े भंडारण पात्र, भारत और भूमध्यसागरीय क्षेत्र के बीच व्यापार से जुड़े पात्रों के टुकड़े, फिरोजी रंग के चमकीले पात्र तथा मेसोपोटामिया शैली के पात्र मिले हैं। समुद्र में डूबी घाट संरचनाओं, ज्वार-भाटा क्षेत्र में बस्तियों के अवशेष और बंदरगाह संरचनाओं पर मिले जलचिह्नों से एलिफेंटा के व्यापक समुद्री व्यापार तंत्र से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

आईआईटी खड़गपुर की परियोजना की मुख्य अन्वेषक प्रोफेसर मेलिंदा बेरा ने बताया कि एलिफेंटा तथा पश्चिमी तट के अन्य हिस्सों से मिट्टी और तलछट के नमूने लिए जाएंगे। इनके रेडियोकार्बन काल निर्धारण तथा विभिन्न समस्थानिकों के अध्ययन से प्राचीन जलवायु और समुद्र स्तर का पता लगाया जाएगा।

परियोजना के सह-अन्वेषक प्रोफेसर वी. रविकांत ने बताया कि पुरातात्विक बर्तनों और पात्रों में इस्तेमाल मिट्टी का भी समस्थानिक अध्ययन किया जाएगा। इससे उनके निर्माण में प्रयुक्त मिट्टी के स्रोत का पता लगाने में मदद मिलेगी। शोध वैज्ञानिक अजय यादव ने कहा कि एलिफेंटा भारत के प्राचीन समुद्री व्यापार के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए नया अवसर प्रदान करता है।

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता