home page

हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी खड़गपुर की पहल

 | 
हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी खड़गपुर की पहल


हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी खड़गपुर की पहल


खड़गपुर, 24 मार्च (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के अंतर्गत स्थापित यूनिफाइड एआई-सक्षम क्राफ्ट इकोसिस्टम प्लेटफॉर्म के लिए उत्कृष्टता केंद्र, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से अपनी प्रथम क्राफ्ट टूलकिट कार्यशाला “सृष्टि ओ अनुसंधान” का आयोजन 25 मार्च से दो अप्रैल 2026 तक आईआईटी खड़गपुर परिसर में करेगा। इस कार्यशाला का उद्घाटन 25 मार्च 2026 को प्रातः 10:30 बजे राजेंद्र मिश्रा स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंटरप्रेन्योरशिप में आयोजित किया जाएगा।

यह जानकारी मंगलवार शाम आईआईटी खड़गपुर द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि यह कार्यशाला देशभर की सात प्रमुख हस्तशिल्प परंपराओं एवं क्लस्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले 15 कुशल शिल्पकारों को एक मंच पर लाएगी। इनमें तमिलनाडु का कल्लाकुरिची वुड कार्विंग (जीआई), जम्मू-कश्मीर का खातामबंद, आंध्र प्रदेश का उदयगिरि वुडन कट्लरी, पूर्वोत्तर क्षेत्र का केन एवं बांस शिल्प, उत्तर प्रदेश का सहारनपुर वुड क्राफ्ट, दिल्ली स्थित वुड क्राफ्ट परंपरा तथा ओडिशा की वुड कार्विंग परंपरा शामिल हैं।

प्रतिभागी शिल्पकारों में राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर के पुरस्कार प्राप्त अनुभवी एवं पारंपरिक कारीगर शामिल हैं, जो भारत की विविधतापूर्ण हस्तशिल्प विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस पहल का उद्देश्य शिल्प प्रक्रियाओं, उपकरणों, सामग्रियों एवं उत्पादन पद्धतियों का व्यवस्थित प्रलेखन करना तथा शिल्पकारों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। यह कार्यशाला उत्कृष्टता केंद्र की व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जिसे विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) द्वारा समर्थित किया गया है। ये तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—सूक्ष्म स्तर पर परियोजना एकीकरण एवं पोर्टल विकास, मध्य स्तर पर कार्यशालाएं एवं टूलकिट संवर्धन तथा डिज़ाइन रिपॉजिटरी, और व्यापक स्तर पर एआई एवं एलएलएम आधारित क्राफ्ट रिपॉजिटरी, शिक्षण, डिज़ाइन वैलिडेशन एवं सह-निर्माण।

कार्यशाला के दौरान शिल्पकार अपने कार्य कौशल का प्रदर्शन करेंगे, उपयोग किए जाने वाले उपकरणों एवं सामग्रियों के बारे में जानकारी साझा करेंगे तथा आईआईटी खड़गपुर की टीम के साथ मिलकर टूलकिट के प्रलेखन, विश्लेषण एवं संभावित सुधारों पर कार्य करेंगे। इस प्रक्रिया से भविष्य में प्रलेखन, टूलकिट विकास, शिक्षण सामग्री निर्माण, डिज़ाइन डेटाबेस एवं बाजार से जुड़ाव की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है। चयनित नमूने एवं प्रोटोटाइप उत्कृष्टता केंद्र में अध्ययन, परीक्षण एवं प्रदर्शन हेतु सुरक्षित रखे जा सकते हैं।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग 28 एवं 29 मार्च 2026 को आयोजित विशेषज्ञ संवाद सत्र होंगे, जिनमें शिल्प प्रक्रियाओं, उपकरणों, सामग्रियों, चुनौतियों एवं समुदाय-स्वीकार्य नवाचारों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इस अवसर पर प्रो. प्रियदर्शी पटनायक, परियोजना के प्रमुख अन्वेषक एवं कार्यशाला समन्वयक ने कहा कि यह पहल भारतीय हस्तशिल्प के लिए एक दीर्घकालिक, शोध-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम है। हम विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज एवं उनके कार्यालय के सहयोग के लिए आभारी हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता