आईआईटी खड़गपुर-पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने एआई लैब स्थापना का समझौता किया
खड़गपुर, 02 मार्च (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर ने पर्सिस्टेंट सिस्टम्स फाउंडेशन के साथ कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स इनोवेशन लैब फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए एक समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह अत्याधुनिक एआई नवाचार प्रयोगशाला फाउंडेशन द्वारा प्रदान की गई दस करोड़ की उदार प्रारंभिक अनुदान राशि से स्थापित की जा रही है। यह पहल आईआईटी खड़गपुर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान, बहु-विषयी नवाचार तथा व्यावहारिक अनुप्रयोगों को नई गति प्रदान करेगी।
समारोह में पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. आनंद देशपांडे, डीन (पूर्व छात्र मामले) प्रो. सिद्धार्थ मुखर्जी, एसोसिएट डीन प्रो. पुनीत पात्र, पूर्व निदेशक प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो. निलोय गांगुली, विद्युत अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो. चंदन चक्रवर्ती तथा विभाग के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित थे।
आईआईटी खड़गपुर (बी. टेक., सीएसई, 1984) के पूर्व छात्र डॉ. आनंद देशपांडे ने इस पहल के माध्यम से अपने संस्थान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया है। यह सहयोग दर्शाता है कि पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन और सहयोग संस्थान की शैक्षणिक एवं अनुसंधान उत्कृष्टता को नई दिशा दे सकता है।
अपने व्याख्यान में डॉ. देशपांडे ने भारतीय परिप्रेक्ष्य में एआई के भविष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से जैव-चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले डेटा संग्रहण एवं संधारण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में अलग-थलग अनुसंधान के स्थान पर अंतःविषयक एवं सहयोगात्मक प्रयास ही जटिल वास्तविक समस्याओं के समाधान में सहायक सिद्ध होते हैं। “सीखना कैसे सीखें” विषय पर उनके विचारों ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विशेष रूप से प्रेरित किया।
डॉ. देशपांडे ने संस्थान के निदेशक सुमन चक्रवर्ती से भी भेंट कर प्रयोगशाला की दीर्घकालिक दृष्टि एवं उद्योग, शिक्षा सहयोग के व्यापक आयामों पर विचार-विमर्श किया। यह संवाद संस्थान के भावी विकास में सशक्त साझेदारी की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
यह समझौता अकादमिक–औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा समाजोपयोगी एआई अनुसंधान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

