आईआईटी खड़गपुर दीक्षांत समारोह में विकसित भारत के निर्माण का आह्वान
खड़गपुर, 04 जुलाई (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के 72वें वार्षिक दीक्षांत समारोह एवं संस्थान की 75वीं वर्षगांठ (प्लेटिनम जयंती) के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार और संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को केवल तकनीकी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से युक्त जिम्मेदार नागरिक की भूमिका भी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल करियर और आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समाज, मानवता और राष्ट्र के विकास में योगदान होना चाहिए।
शनिवार को आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा देश-विदेश के शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर न्यूयॉर्क विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. निकोलस बी. डार्क्स, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती, जगन्नाथ चटर्जी, दिलीप घोष, पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. शेखर सी. मांडे तथा आईआईटी खड़गपुर के शासी निकाय के अध्यक्ष टी. वी. नरेंद्रन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर देश के सभी आईआईटी संस्थानों की जननी है और यहीं से आधुनिक तकनीकी शिक्षा की मजबूत नींव रखी गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवा वैज्ञानिकों, अभियंताओं और तकनीकी विशेषज्ञों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधि प्राप्ति पर बधाई देते हुए कहा कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा पूरी करना कठिन परिश्रम, अनुशासन और प्रतिभा का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को बहुविषयक, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क, दीक्षा, स्वयं और कौशल भारत डिजिटल हब जैसी पहलें युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एसओएआर पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डॉ. मजूमदार ने विद्यार्थियों से रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से देश की चुनौतियों का समाधान खोजने में युवाओं को अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम् का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से ज्ञान के साथ विनम्रता और जिम्मेदारी का भाव बनाए रखने की अपील की।
संस्थान के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में केवल सफलता प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में सार्थकता हासिल करना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल तकनीक का निर्माण न करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि तकनीक मानवीय बुद्धिमत्ता, करुणा और नैतिक मूल्यों से संचालित हो।
उन्होंने बताया कि आईआईटी खड़गपुर को वैश्विक स्तर पर बहुविषयक तकनीकी विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने के लिए पांच प्रमुख स्तंभ—लोग, उद्देश्य, साझेदारी, समृद्धि और वैश्विक पहचान—पर आधारित कार्ययोजना लागू की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत 14 हजार 285 से अधिक विद्यार्थियों ने एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट आईडी बनाई है।
निदेशक ने बताया कि छात्र कल्याण के लिए 'सेतु' वेलबीइंग फ्रेमवर्क लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत 'मित्रा' संकाय मार्गदर्शन, 'सारथी' सहपाठी परामर्श तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल सहयोगी के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। बीते वर्ष संस्थान में 359 करोड़ रुपये की 336 प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएं तथा 55 करोड़ रुपये की 275 औद्योगिक परामर्श परियोजनाएं संचालित की गईं। क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग-2027 में संस्थान ने 205वां स्थान प्राप्त किया है। अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क श्रेणी में सभी आईआईटी में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

