हावड़ा में समान नागरिक संहिता पर संगोष्ठी, संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं पर हुई चर्चा
हावड़ा, 29 अगस्त (हि.स.)। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर शनिवार को हावड़ा के निशचिंदा स्थित श्री रामकृष्ण विवेकानंद मिशन कॉलेज ऑफ जुडिशियल स्टडीज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। श्री रामकृष्ण विवेकानंद मिशन कॉलेज ऑफ जुडिशियल स्टडीज और सिटिजंस ऑफ जस्टिस, कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में यूसीसी के कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं पर कानूनविदों एवं शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन गीत के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित कर पश्चिम बंगाल सरकार के संसदीय कार्य तथा शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों के राज्य मंत्री और उत्तर हावड़ा के विधायक उमेश राय ने संगोष्ठी का औपचारिक उद्घाटन किया।
कॉलेज के प्रिंसिपल ने अपने संबोधन में अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों और समुदायों का देश है, लेकिन सभी नागरिकों की पहचान भारतीय के रूप में है। उनके अनुसार, सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था तैयार करने में समान नागरिक संहिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने राजनीतिक विरोध के बावजूद देश की प्रगति के लिए यूसीसी की आवश्यकता पर जोर दिया। कानून के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।
उमेश राय ने कहा कि देश के राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में ‘एक देश, एक कानून’ की अवधारणा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक कानून’ के विचार का उल्लेख करते हुए समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यूसीसी को लेकर आम लोगों के बीच कई तरह की गलतफहमियां हैं। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं है और इसके लागू होने से किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान नहीं बदलेगी। इसका उद्देश्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि विवाह, विवाह विच्छेद और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों में सभी के लिए समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू किए जाने का उल्लेख करते हुए उमेश राय ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कानून के विद्यार्थियों से यूसीसी को लेकर लोगों के बीच मौजूद भ्रम को दूर करने और इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश (डॉ.) संबुद्ध चक्रवर्ती और गोयनका कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (डॉ.) प्रेम कुमार अग्रवाल उपस्थित रहे। इसके अलावा साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज की विधि विभाग की सहायक प्रोफेसर (डॉ.) मौस्री बशिष्ठा, योगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज के विधि विभाग के सहायक प्रोफेसर (डॉ.) सोमनाथ राय और समाजसेवी डॉ. निर्मलेंदु सामंत भी मौजूद रहे।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने यूसीसी की आवश्यकता, इसकी संवैधानिक स्थिति, व्यक्तिगत कानून और विभिन्न नागरिक मामलों में समान कानून के संभावित प्रभावों पर विचार रखे। विवाह, विवाह विच्छेद, उत्तराधिकार और नागरिकों के समान अधिकार जैसे विषयों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। वक्ताओं ने यूसीसी से जुड़े समाज में प्रचलित विभिन्न सवालों और धारणाओं की कानूनी व्याख्या करते हुए आम लोगों के बीच इस विषय को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

