फरक्का रेल संकट के बीच बस किराए में भारी उछाल, 17 सौ का टिकट छह हजार तक पहुंचा
कोलकाता, 05 सितंबर (हि.स.)। न्यू फरक्का स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के नीचे धंसान के बाद उत्तर बंगाल से कोलकाता के बीच रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया है। उत्तर बंगाल आने-जाने वाली बड़ी संख्या में ट्रेनें रद्द हैं, जबकि कुछ ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है। रेल सेवा बाधित होने के बाद यात्रियों का दबाव अब बसों पर बढ़ गया है। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त और स्पेशल बसें चलाने के बावजूद यात्रियों की भीड़ कम होती नजर नहीं आ रही है।
सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को हो रही है, जो इलाज के लिए उत्तर बंगाल से कोलकाता आते हैं। मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद सहित विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में मरीज रात की ट्रेन पकड़कर कोलकाता पहुंचते हैं और सुबह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इलाज कराने के बाद बस या ट्रेन से वापस लौटते हैं। रेल सेवा बाधित होने से इन मरीजों और उनके परिजनों के सामने अब घर लौटने का संकट खड़ा हो गया है।
धर्मतला बस टर्मिनस और निजी बस काउंटरों पर यात्रियों की लंबी कतार देखने को मिल रही है। यात्रियों का आरोप है कि मांग बढ़ने का फायदा उठाकर कुछ निजी बसों में किराया कई गुना बढ़ा दिया गया है। आरोप है कि करीब 17 सौ रुपये का टिकट ‘डायनेमिक फेयर’ के नाम पर 6 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है। कुछ यात्रियों के मुताबिक दोपहर में जिस टिकट की कीमत करीब 3,000 रुपये थी, वह महज एक घंटे के भीतर बढ़कर 5,900 रुपये तक पहुंच गई।
इस संकट का सबसे दर्दनाक उदाहरण मालदा निवासी कैंसर मरीज नवकांत बसाक (70) का है। उन्हें उनके बेटे-बेटियां इलाज और कीमोथेरेपी के लिए कोलकाता लेकर आए थे। रेल सेवा बंद होने के बाद परिवार ने बस से लौटने की कोशिश की, लेकिन टिकट नहीं मिलने के कारण उन्हें एस्प्लेनेड बस टर्मिनस में पेड़ के नीचे इंतजार करना पड़ा।
नवकांत के बेटे सुजीत बसाक के मुताबिक, पिता की हालत ऐसी है कि उन्हें लेटाकर ले जाना बेहतर होगा, लेकिन ट्रेन सेवा कब सामान्य होगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। बस से लौटने के लिए धर्मतला पहुंचे तो वहां भी यात्रियों की संख्या के मुकाबले बसें बेहद कम नजर आईं।
रायगंज निवासी बूलू घोष ने बताया कि उनके मरीज को करीब 10 दिनों तक पीजी अस्पताल में भर्ती रखा गया था और शुक्रवार को छुट्टी मिली। ट्रेन बंद होने के बाद वह बस से घर लौटने पहुंचे, लेकिन टिकट कब मिलेगा और बस कब मिलेगी, इसका कोई भरोसा नहीं ह
रेल संकट को देखते हुए राज्य परिवहन विभाग ने अतिरिक्त बसें चलाने का फैसला किया है। विभाग के अनुसार, कोलकाता-सिलीगुड़ी मार्ग के अलावा उत्तर बंगाल के विभिन्न रूटों पर भी अतिरिक्त बसें उतारी गई हैं। कोलकाता से सिलीगुड़ी के बीच 23 अतिरिक्त बसें चलाने की व्यवस्था की गई है। मालदा से सिलीगुड़ी के बीच भी बस सेवा बढ़ाई गई है। परिवहन विभाग के अनुसार, एस्प्लेनेड से शाम साढ़े पांच बजे से हर एक घंटे के अंतराल पर सिलीगुड़ी के लिए बसें चलाने की व्यवस्था की गई है। उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम को भी अतिरिक्त बसें चलाने का निर्देश दिया गया है।
सरकार ने निजी बस संचालकों को मनमाना किराया नहीं लेने की चेतावनी दी है। प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को बस ऑपरेटरों से बातचीत कर अतिरिक्त किराया वसूली पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
परिवहन विभाग ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो निजी बसों को अस्थायी रूप से सरकार के नियंत्रण में लेकर यात्रियों के लिए चलाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए आवश्यकता के अनुसार और कड़े कदम उठाए जाएंगे।
रेल संकट का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। कोलकाता निवासी ईप्सिता मित्र ने बताया कि बेटे की परीक्षा खत्म होने के बाद उन्होंने दार्जिलिंग जाने की योजना बनाई थी। शुक्रवार की कंचनजंघा एक्सप्रेस में एसी-2 टियर की टिकट बुक थी, लेकिन अचानक ट्रेन रद्द होने का संदेश मिला। उन्होंने बताया कि बस से दार्जिलिंग जाने की कोशिश की तो प्रति व्यक्ति करीब 5,900 रुपये तक किराया बताया गया। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन रद्द होने के बाद उनके होटल और वाहन की बुकिंग भी प्रभावित हो रही है। वहीं, महंगे बस किराए ने परेशानी और बढ़ा दी है।
रेल सेवा बहाल होने तक उत्तर बंगाल और कोलकाता के बीच यात्रियों का दबाव बसों पर बने रहने की संभावना है। ऐसे में अतिरिक्त बसों के बावजूद किराए पर नियंत्रण और पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

