सुकना स्टेशन पर ‘हेरिटेज टॉय ट्रेन डे’ का आयोजन, संस्कृति और विरासत का दिखा संगम
सिलीगुड़ी, 04 जुलाई (हि. स.)। दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) के 145वें विश्व धरोहर ‘हेरिटेज टॉय ट्रेन डे’ के अवसर पर सुकना रेलवे स्टेशन पर शनिवार भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस मौके पर कला, संस्कृति और विरासत संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकारों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
उत्तर बंगाल पेंटर्स एसोसिएशन की पहल पर आयोजित इस समारोह में ‘सिट एंड ड्रॉ’ प्रतियोगिता, लाइव पेंटिंग, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जागरूकता कार्यक्रमों ने माहौल को जीवंत बना दिया।
आयोजकों का उद्देश्य नई पीढ़ी को टॉय ट्रेन के ऐतिहासिक महत्व और उसकी विश्व धरोहर पहचान से अवगत कराना था। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह बताया गया कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
इस अवसर पर डीएचआर के निदेशक ऋषभ चौधरी ने टॉय ट्रेन के महत्व और उसकी ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह विरासत न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
करीब डेढ़ सौ वर्षों से दार्जिलिंग की पहचान बनी यह टॉय ट्रेन आज भी अपनी विरासत और लोकप्रियता को कायम रखते हुए लोगों को इतिहास से जोड़ने का कार्य कर रही है।
सुकना स्टेशन पर आयोजित यह कार्यक्रम उसी विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

