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64 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरण गायब, स्वास्थ्य विभाग ने दिए एफआईआर के सख्त निर्देश

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64 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरण गायब, स्वास्थ्य विभाग ने दिए एफआईआर के सख्त निर्देश


कोलकाता, 22 सितंबर (हि. स.)। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों के पुर्जे रहस्यमय तरीके से गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बड़ी लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पंद्रहवें वित्त आयोग के फंड से खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों की चोरी के मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 12 जिलों के 64 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सा उपकरणों की चोरी की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन 64 सरकारी संस्थानों में 50 उप-स्वास्थ्य केंद्र, 13 ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इस सूची में हावड़ा जिला सबसे ऊपर है, जहां 25 स्वास्थ्य केंद्रों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। हावड़ा के इन मामलों में से 18 स्वास्थ्य केंद्र संकराइल में स्थित हैं, जबकि बाकी सात श्यामपुर दो नंबर ब्लॉक के अंतर्गत आते हैं।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के दौरान ग्रामीण स्तर पर चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वर्ष 2021-22 में पंद्रहवें वित्त आयोग ने इन उपकरणों की खरीद के लिए विशेष धनराशि आवंटित की थी। यह भारी-भरकम राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन परियोजना के तहत मंजूर की गई थी। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए इन जीवन रक्षक उपकरणों के उचित रखरखाव और उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2024 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तत्कालीन निदेशक ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र भी भेजा था।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि आम लोगों की जान बचाने और उन्हें सुविधा देने के लिए महामारी के समय ये सामग्रियां भेजी गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को ये उपकरण सौंपे गए थे, इस चोरी की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं को लेनी होगी।

विभाग ने अपने निर्देश में साफ कर दिया है कि ड्यूटी में लापरवाही साबित होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार कर्मचारियों या अधिकारियों के वेतन से पैसे काटकर इस नुकसान की भरपाई भी की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर