आईसीएमआर ने आईआईटी खड़गपुर की हीमो-क्यूआर किट को दी मंजूरी
खड़गपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर द्वारा विकसित वहनीय हीमोग्लोबिन अनुमान किट हीमो-क्यूआर को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने रक्ताल्पता की निश्चित-स्थान-जांच के लिए आधिकारिक रूप से अनुशंसित किया है।
संस्थान की ओर से सोमवार शाम को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह तकनीक स्मार्ट-क्यूआर टेक्नोलॉजीज द्वारा प्रो. सुमन चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में विकसित की गई है। इसे आईआईटी खड़गपुर के आईसीएमआर-डीएचआर उत्कृष्टता केंद्र तथा डीएसआईआर-सीआरटीडीएच में पोषित किया गया है।
हीमो-क्यूआर एक अभिनव, यंत्र-रहित निश्चित-स्थान नैदानिक तकनीक है। यह कागज-आधारित सूक्ष्म-द्रविकी और स्मार्टफोन आधारित चित्र विश्लेषण की मदद से, उंगली में हल्की चुभन से लिए गए रक्त नमूने के माध्यम से तेजी से हीमोग्लोबिन का अनुमान प्रदान करती है।
इस तकनीक का व्यापक विश्लेषणात्मक सत्यापन नई दिल्ली स्थित बर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल में किया गया है। परीक्षण के आधार पर इसे अस्पतालों में रक्ताल्पता की छंटनी और प्रारंभिक जांच के लिए उपयुक्त पाया गया है।
यह उपलब्धि एनीमिया मुक्त भारत अभियान तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो रक्ताल्पता की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक नैदानिक और सामुदायिक दोनों स्तरों पर उपयोग के लिए अत्यंत संभावनाशील है।
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि हीमो-क्यूआर किफायती और सुलभ निश्चित-स्थान चिकित्सा तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत में रक्ताल्पता जैसी गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती से निपटने में सहायक होगा। उन्होंने इसे शैक्षणिक शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग के सफल समन्वय का उदाहरण बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

