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स्वास्थ्यसाथी में फर्जी बिल का मामला, पूर्व बर्धमान के अस्पताल पर जांच

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कोलकाता, 23 अगस्त (हि. स.)। आम लोगों को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से विभिन्न स्वास्थ्य बीमा योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आरोप है कि इन योजनाओं के तहत उपलब्ध भारी भरकम धनराशि पर निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम के एक वर्ग की नजर है। स्वास्थ्य भवन की आंतरिक जांच में ऐसी ही अनियमितताओं का मामला सामने आया है।

हाल ही में स्वास्थ्य भवन की एक प्रतिनिधि टीम ने पूर्व बर्धमान के एक निजी बहु-विशेषता अस्पताल का अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी योजना के लिए निर्धारित धनराशि हासिल करने का मामला सामने आया। स्वास्थ्य भवन की ओर से अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

स्वास्थ्य भवन के सूत्रों के अनुसार, जांच में मुख्य रूप से चार प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हैं। स्वास्थ्यसाथी योजना में ‘चिकित्सा प्रबंधन पैकेज’ के तहत भर्ती मरीज के उपचार खर्च की कोई निश्चित सीमा नहीं है। वहीं, शल्य चिकित्सा के लिए अलग पैकेज निर्धारित है और उसमें खर्च की सीमा तय रहती है। आरोप है कि पूर्व बर्धमान के संबंधित नर्सिंगहोम में शल्य चिकित्सा वाले मरीजों को चिकित्सा प्रबंधन पैकेज के तहत भर्ती दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए।

स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी के अनुसार, हड्डी संबंधी शल्य चिकित्सा का खर्च सामान्यतः 30 से 45 हजार रुपये के बीच होता है, जबकि चिकित्सा प्रबंधन पैकेज के तहत मस्तिष्काघात के उपचार का खर्च 90 हजार रुपये तक दिखाया गया। जांच में ऐसे 14 मामले सामने आने का दावा किया गया है।

इसके अलावा ऐसे मरीजों को भी स्वास्थ्यसाथी योजना के तहत भर्ती दिखाने का आरोप है, जिनकी बीमारी का उपचार योजना में शामिल नहीं है।

स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी ने बताया कि अस्पताल के अभिलेखों में रीढ़ की हड्डी की शल्य चिकित्सा अर्थोपेडिक चिकित्सक द्वारा किए जाने की बात सामने आई, जबकि ऐसी शल्य चिकित्सा सामान्यतः तंत्रिका शल्य चिकित्सक करते हैं।

जांच के दौरान कथित तौर पर पुराने मस्तिष्काघात के मरीजों की सीटी स्कैन रिपोर्ट का दुरुपयोग किए जाने की बात भी सामने आई। आरोप है कि पुराने मरीजों की रिपोर्ट में कंप्यूटर के माध्यम से नाम और जांच की तारीख बदलकर अन्य मरीजों को मस्तिष्काघात का मरीज दिखाया गया।

निजी अस्पताल और नर्सिंगहोम से जुड़े संगठन के कई सदस्यों का दावा है कि पूर्व बर्धमान का मामला केवल एक उदाहरण है। राज्य के विभिन्न जिलों में भी कुछ निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम द्वारा इसी तरह की अनियमितताएं किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंगहोम के सचिव राजीव पांडे ने कहा कि संगठन इस प्रकार की किसी भी अनियमितता का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि भ्रष्टाचार में लिप्त नर्सिंगहोम और अस्पतालों को संगठन का सदस्य नहीं बनाने का निर्णय लिया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता