आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले की पुनर्जांच से हाईकोर्ट असंतुष्ट, सीबीआई से कहा- पुरानी जांच के प्रभाव से बाहर निकलें
कोलकाता, 06 अगस्त (हि.स.)। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या मामले की पुनर्जांच को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जांच सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है और जिन पहलुओं की पड़ताल की जानी चाहिए, उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ के समक्ष सीबीआई की नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए और समय मांगा। इस पर अदालत ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी और तब तक जांच की ठोस प्रगति तथा अंतिम स्थिति से अदालत को अवगत कराया जाए।
इस मामले की प्रारंभिक जांच कोलकाता पुलिस ने की थी और मुख्य आरोपित संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में संजय रॉय को एकमात्र आरोपित बताया, जिसके आधार पर सियालदह अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि पीड़िता का परिवार शुरू से ही पुलिस और सीबीआई की जांच से असंतुष्ट रहा और पुनर्जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद अदालत के निर्देश पर सीबीआई ने नई एसआईटी का गठन किया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति शम्पा सरकार ने कहा कि अदालत शुरू से ही यह जानना चाहती है कि घटना वाली रात घटनास्थल से लेकर शवदाह गृह तक क्या-क्या हुआ था, लेकिन इस पहलू की समुचित जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने सीबीआई से कहा कि वह पहले की जांच के निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना नए सिरे से स्वतंत्र जांच करे।
पीड़िता के परिवार की ओर से अधिवक्ता जयंत कुमार चट्टोपाध्याय ने अदालत को बताया कि घटना की रात पीड़िता के साथ भोजन करने वाले चार जूनियर डॉक्टरों से अस्पताल के तत्कालीन प्राचार्य संदीप घोष के कथित संबंधों की जांच नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन चारों से पर्याप्त पूछताछ नहीं हुई और उनमें से एक जूनियर डॉक्टर सौमित्र रॉय का बयान तक दर्ज नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने भी सवाल उठाया कि क्या सभी जूनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए हैं और घटना के अगले दिन सुबह पीड़िता की मां को अस्पताल कब बुलाया गया था। जवाब में सीबीआई ने कहा कि सभी आरोपों की नए सिरे से गहन जांच की जा रही है, अनुभवी अधिकारी इस पर काम कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
सीबीआई की दलील सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि वह जांच की अंतिम प्रगति देखना चाहती है। मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गंगा

