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जालदापाड़ा की अरन्या पर्यटन स्थल में दो बेली पुल बनाएगा जीआरएसई

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जालदापाड़ा की अरन्या पर्यटन स्थल में दो बेली पुल बनाएगा जीआरएसई


कोलकाता, 29 अगस्त (हि.स.)। उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में स्थित जालदापाड़ा की अरन्या पर्यटन स्थल में लंबे समय से चली आ रही संपर्क व्यवस्था की समस्या को दूर करने के लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) दो बेली पुलों का निर्माण करेगा। पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने शनिवार को कोलकाता में आयोजित जीआरएसई के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी।

यह परियोजना वर्ष 2025 में उत्तर बंगाल में आई भीषण बाढ़ के बाद सामने आई संपर्क व्यवस्था की गंभीर समस्या को देखते हुए शुरू की जा रही है। बाढ़ के दौरान पर्यटन संपत्ति तक पहुंचने वाला एक पुल बह गया था। इससे जालदापाड़ा क्षेत्र में सड़क और पुलों को व्यापक नुकसान पहुंचा तथा सरकारी पर्यटन केंद्र में ठहरे कई पर्यटक भी फंस गए थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने कहा, जालदापाड़ा की अरन्या पर्यटन संपत्ति में लंबे समय से चली आ रही संपर्क व्यवस्था की समस्या के समाधान के लिए जीआरएसई की सहायता से दो बेली पुलों का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इन पुलों की नींव संबंधी अभियांत्रिकी में भारतीय अभियांत्रिकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, शिवपुर (आईआईईएसटी) तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।

अक्टूबर 2025 में उत्तर बंगाल में हुई भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था। जालदापाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में सड़क एवं पुलों को भारी नुकसान पहुंचा था। पर्यटन केंद्र तक पहुंच बाधित होने के बाद सरकारी पर्यटन आवास में ठहरे पर्यटक फंस गए थे, जिन्हें बाद में अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

घोष ने कहा कि उत्तर बंगाल में वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन को बनाए रखने तथा उसका विस्तार करने के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा बेहद आवश्यक है।

उन्होंने कहा, जालदापाड़ा वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि हम पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देना चाहते हैं और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं, तो भरोसेमंद संपर्क व्यवस्था आवश्यक है।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि उत्तर बंगाल में पर्यटन संबंधी आधारभूत ढांचे का विकास करते समय क्षेत्र की भौगोलिक एवं मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने कहा, पर्यटन आधारभूत ढांचे का विकास करते समय हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वह टिकाऊ हो और उत्तर बंगाल की भौगोलिक परिस्थितियों तथा भारी बारिश एवं बाढ़ से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।

अरन्या पर्यटन संपत्ति, जिसे पहले जालदापाड़ा पर्यटक आवास के नाम से जाना जाता था, जालदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है और वर्तमान में भी पर्यटकों के लिए संचालित है।

जालदापाड़ा अपने एक सींग वाले गैंडे और विशाल घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है। यह पश्चिम बंगाल के प्रमुख वन्यजीव एवं प्रकृति पर्यटन केंद्रों में शामिल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय