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बंगाल बजट से पहले उद्योग जगत से सरकार की चर्चा, निवेश और कारोबार सुगमता पर जोर

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बंगाल बजट से पहले उद्योग जगत से सरकार की चर्चा, निवेश और कारोबार सुगमता पर जोर


कोलकाता, 02 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त विभाग ने मंगलवार को आगामी राज्य बजट से पहले उद्योग मंडलों और व्यापारिक संगठनों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की। राज्य में भाजपा सरकार के पहले बजट से पूर्व आयोजित इस बैठक में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश बढ़ाने, कारोबार को आसान बनाने और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विभिन्न सुझाव दिए।

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रभात कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स, क्रेडाई, एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, भारतीय उद्योग परिसंघ समेत कई उद्योग एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में राज्य कर आयुक्त खालिद अनवर सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार ने बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग और व्यापार जगत की राय जानने के उद्देश्य से यह बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने आगामी बजट को लेकर अपनी अपेक्षाएं और सुझाव रखे।

चर्चा के दौरान निवेश प्रोत्साहन, हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र का विकास, सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा, व्यापार लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने, एकल खिड़की स्वीकृति व्यवस्था को मजबूत करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।

भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स ने राज्य में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के लिए अपनी सिफारिशों वाला एक ज्ञापन सरकार को सौंपा और आवश्यक नीतिगत उपायों पर प्रस्तुति भी दी।

राज्य का बजट 22 जून को विधानसभा में पेश किया जाना प्रस्तावित है, जबकि बजट सत्र 18 जून से शुरू होगा। हालांकि भाजपा सरकार अभी तक राज्य के वित्त मंत्री के नाम की घोषणा नहीं कर पाई है। पार्टी विधायकों के अनुसार, सोमवार को 35 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद विस्तारित मंत्रिमंडल में विभागों का बंटवारा बुधवार को किया जा सकता है।

उद्योग जगत की नजर सरकार की भूमि और औद्योगिक नीति पर भी टिकी हुई है। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने भूमि सीमा कानून की समीक्षा की वकालत करते हुए कहा था कि बड़े औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए भूमि की उपलब्धता आसान बनाना आवश्यक है।

भट्टाचार्य ने निवेश परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी देने और उद्योग हितैषी नीतिगत ढांचे की भी पैरवी की थी। उन्होंने कहा था कि औद्योगीकरण और रोजगार सृजन राज्य की भाजपा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर