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उत्तर बंगाल में बाढ़ नियंत्रण पर संकट, 80 करोड़ की परियोजनाएं अटकी

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उत्तर बंगाल में बाढ़ नियंत्रण पर संकट, 80 करोड़ की परियोजनाएं अटकी


जलपाईगुड़ी, 13 मई (हि. स.)। उत्तर बंगाल में बाढ़ नियंत्रण को लेकर बड़ा संकट सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 80 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के डीपीआर को मंजूरी न मिलने से बरसात से पहले जरूरी काम अधर में लटक गए है।

उत्तर बंगाल की प्रमुख नदियों—तिस्ता, तोर्सा, कालजानी, रायडाक, संकोश, जलढाका और महानंदा—पर बाढ़ नियंत्रण के बड़े प्रोजेक्ट फिलहाल चुनौती बने हुए है। इस मुद्दे को 20 मई को कोलकाता में होने वाली प्री-मानसून समीक्षा बैठक में उठाया जाएगा।

सिंचाई विभाग के उत्तर-पूर्व सर्कल के मुख्य अभियंता कृष्णेंदु भौमिक ने चिंता जताते हुए कहा कि लंबित परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने के लिए नई सरकार से अनुरोध किया गया है।

उन्होंने बताया कि तीस्ता नदी की ड्रेजिंग को लेकर पहले भी योजना बनी थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और चुनावी कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका।

स्थिति यह है कि सेवक से मेखलीगंज तक करीब 52 किलोमीटर तक तीस्ता नदी का नदी तल ऊंचा हो गया है, जिससे बरसात में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। पिछले दो महीनों में पहाड़ और मैदानी इलाकों में अच्छी बारिश होने से नदियों में पहले ही काफी पानी है, जिससे बड़ा काम शुरू करना मुश्किल हो गया है।

बैठक में यह भी तय हुआ कि फिलहाल आपदा से निपटने के लिए निर्माण सामग्री का भंडारण ही सबसे व्यावहारिक उपाय है। साथ ही, जल स्तर की स्थिति देखकर ही आगे काम शुरू किया जाएगा।

इस दौरान नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (एनएचपीसी) लिमिटेड और तीस्ता बैराज प्राधिकरण से भी समन्वय किया गया। उनसे अनुरोध किया गया है कि बरसात के दौरान पानी छोड़ने से पहले सिंचाई विभाग को समय रहते सूचना दें।

मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों में सामान्य से लगभग दोगुनी बारिश दर्ज की गई है। आने वाले समय में जलपाईगुड़ी, कूचबिहार के साथ-साथ दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भी नए वर्षा मापक उपकरण लगाए जाएंगे। हालांकि, उत्तर बंगाल में मानसून कब प्रवेश करेगा, इसका स्पष्ट संकेत मई के अंत तक ही मिल पाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार