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नवान्न में शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे फिरहाद, कुणाल और नयना, तृणमूल की अंदरूनी खींचतान के बीच बढ़ी सियासी चर्चा

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नवान्न में शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचे फिरहाद, कुणाल और नयना, तृणमूल की अंदरूनी खींचतान के बीच बढ़ी सियासी चर्चा


कोलकाता, 03 जून (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेता बुधवार को नवान्न में आयोजित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में शामिल हुए। बैठक में तृणमूल नेता फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, नयना बंद्योपाध्याय, अशोक देव समेत कई विधायक मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति को पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों और नेतृत्व संघर्ष के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नवान्न में कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों को लेकर प्रशासनिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। तृणमूल निष्कासित किए गए तृणमूल विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा भी बैठक में शामिल हुए, लेकिन फिरहाद हाकिम, कुणाल घोष और नयना बंद्योपाध्याय जैसे नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कुणाल घोष ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने हॉकर्स को हटाने की कार्रवाई में सरकार से अधिक संवेदनशील और लचीला रुख अपनाने का आग्रह किया। साथ ही स्थानीय विधायकों से चर्चा कर समाधान निकालने का सुझाव दिया गया। कुणाल ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद राजनीतिक कारणों से तृणमूल कार्यकर्ताओं को कथित रूप से परेशान किए जाने का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने रखा गया है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में पुलिस अधिकारियों से बात करने और मामले पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

दरअसल, सोमवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उलूबेड़िया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को तृणमूल से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद बुधवार को दोनों नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर ममता बनर्जी को दल की नेता घोषित करने और ऋतब्रत को विपक्ष का नेता बनाने की मांग की। उपनेता पद के लिए सबीना यासमीन, जावेद खान, शिउली साहा और संदीपन साहा के नाम प्रस्तावित किए गए।

इससे पहले ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया था, लेकिन पार्टी के भीतर विरोधी गुट ने उस निर्णय को मानने से इनकार कर दिया है। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने निर्णय के लिए बुधवार शाम तक का समय मांगा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के नेता के चयन को लेकर तृणमूल में जो दो धड़े स्पष्ट रूप से सामने आए हैं, नवान्न की यह बैठक उन दोनों पक्षों को एक मंच पर ले आई। मंगलवार तक ममता बनर्जी के धरना कार्यक्रम में उनके साथ दिखाई देने वाले फिरहाद, नयना, अशोक देव और कुणाल घोष का अगले ही दिन मुख्यमंत्री की बैठक में शामिल होना विशेष महत्व रखता है।

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर