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मालदा में महानंदा नदी के किनारे बसे परिवारों पर बेदखली का खतरा, प्रशासन से लगाई गुहार

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मालदा में महानंदा नदी के किनारे बसे परिवारों पर बेदखली का खतरा, प्रशासन से लगाई गुहार


मालदा, 18 अगस्त (हि. स.)। महानंदा नदी के किनारे रहने वाले कई परिवारों के सामने अब बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की घोषणा के बीच इन परिवारों में चिंता बढ़ गई है। परिवारों ने प्रशासन से राहत की मांग की है।

ओल्ड मालदा नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर नौ के मंगलबाड़ी इलाके से महानंदा नदी गुजरती है। नदी के किनारे स्थित विस्तृत क्षेत्र में पिछले करीब 12 वर्षों के दौरान कई बस्तियां विकसित हुई है। बारिश के मौसम में यह इलाका नदी के पानी में डूब जाता है, जबकि साल के बाकी समय जमीन सूखी रहती है। इसी जमीन पर कई परिवारों ने घर बनाकर रहना शुरू किया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में कुछ कथित जमीन दलालों ने नदी के चार की जमीन की अवैध तरीके से खरीद-बिक्री की। लोगों का दावा है कि उन्होंने दलालों को करीब एक से डेढ़ लाख रुपये देकर जमीन खरीदी और वहां अपने घर बनाए। अब सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कवायद की खबर से इन परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि उन्हें वहां से हटाया गया तो उनके पास रहने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। इसी वजह से उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नदी के चार की जमीन की नई खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जाए और कथित अवैध जमीन बिक्री की जांच की जाए।

परिवारों ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों ने उनसे जमीन के नाम पर पैसे लिए हैं, उनसे रकम वापस दिलाने के लिए प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करे। उनका कहना है कि यदि उन्हें जमीन से हटाया जाता है, तो वापस मिली रकम से वे किसी दूसरी जगह जमीन खरीदकर अपना आशियाना बना सकेंगे।

मालदा विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक गोपाल चंद्र साहा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान गरीब लोगों को महानंदा के किनारे की जमीन करीब डेढ़ से दो लाख रुपये में बेची गई। उन्होंने इसे पूरी तरह अवैध बताते हुए प्रशासन से मामले की उचित जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने की बात कही है। फिलहाल महानंदा के किनारे बसे परिवारों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। वहीं, अवैध जमीन खरीद-बिक्री के आरोपों की जांच और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार