फलता पुनर्मतदान के लिए चुनाव आयोग ने दोगुनी की सुरक्षा व्यवस्था
कोलकाता, 20 मई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को होने वाले पुनर्मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को लगभग दोगुना कर दिया है। पिछले महीने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में कथित बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ के आरोपों के बाद यहां का मतदान रद्द कर दिया गया था।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि इस बार प्रत्येक मतदान केंद्र पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के आठ जवान तैनात किए जाएंगे, जो एक पूर्ण सेक्शन के बराबर होंगे। 29 अप्रैल को हुए मूल मतदान के दौरान प्रत्येक बूथ पर केवल चार जवान, यानी आधा सेक्शन तैनात था।
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि आयोग इस बार किसी भी प्रकार की अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है।
फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 285 मतदान केंद्र हैं। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की लगभग 35 कंपनियां तैनात की जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, पुनर्मतदान के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती पहले मतदान दिवस की तुलना में लगभग दोगुनी होगी।
इसके अलावा किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटने के लिए 30 त्वरित प्रतिक्रिया दल भी तैयार रहेंगे। एक वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मामूली अशांति की स्थिति में भी तत्काल हस्तक्षेप सुनिश्चित करना आयोग का उद्देश्य है।
चुनाव आयोग ने निगरानी व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। प्रत्येक मतदान केंद्र के अंदर दो वेब कैमरे और बाहर एक कैमरा लगाया जाएगा। मतदान प्रक्रिया और आसपास के क्षेत्रों की लाइव वेबकास्टिंग की जाएगी। निगरानी जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से की जाएगी। पुनर्मतदान के दिन ड्रोन निगरानी पर भी विचार किया जा रहा है। पुनर्मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए तीन चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है।
इस बीच राज्य पुलिस ने भी पुनर्मतदान से पहले कार्रवाई शुरू कर दी है। पश्चिम बंगाल पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें फलता पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान भी शामिल हैं।
मंगलवार को जहांगीर खान ने घोषणा की कि वह गुरुवार को होने वाले पुनर्मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। तृणमूल कांग्रेस ने उनके फैसले को व्यक्तिगत निर्णय बताया है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने देबांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है।
29 अप्रैल को मतदान के दौरान कई बूथों से ईवीएम पर इत्र और चिपकने वाली टेप लगाए जाने की शिकायतें सामने आने के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ था।
तत्कालीन विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने स्वयं क्षेत्र का दौरा कर जांच की थी, जिसके बाद कम से कम 60 बूथों में छेड़छाड़ के प्रमाण मिलने की बात सामने आई थी।
जांच में केवल ईवीएम से छेड़छाड़ ही नहीं, बल्कि कई मतदान केंद्रों पर लगाए गए वेब कैमरों की रिकॉर्डिंग से भी छेड़छाड़ करने की कोशिशों का पता चला था। इसके बाद बूथ स्तरीय अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और यहां तक कि चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।
इन निष्कर्षों के बाद चुनाव आयोग ने पूरे फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी बूथों पर पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया था।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

