फर्जी डिग्री से डॉक्टर बनने के आरोप में पांच लोगों की जांच शुरू, बिहार से हासिल प्रमाणपत्रों से बंगाल में लिया पंजीकरण
कोलकाता, 12 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने बिहार से कथित तौर पर फर्जी मेडिकल डिग्री और दस्तावेज हासिल कर राज्य में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के आरोप में पांच लोगों के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें दो उत्तर 24 परगना और तीन दक्षिण 24 परगना जिले के बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है।
एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स ने स्वास्थ्य विभाग और पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। एसोसिएशन के सचिव राजीव पांडे ने आरोप लगाया कि इन पांच लोगों ने बिहार से हासिल फर्जी मेडिकल डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया। एसोसिएशन ने यह भी दावा किया है कि इन पांचों में से कुछ से इलाज कराने वाले कई मरीजों की मौत हुई है और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं, विशेष रूप से ‘स्वास्थ्य साथी’, के संभावित दुरुपयोग की भी जांच की जानी चाहिए।
राजीव पांडे के अनुसार, एसोसिएशन को विभिन्न जिलों में समितियां गठित करने के दौरान इस मामले की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि करीब एक दर्जन ऐसे लोगों के बारे में जानकारी सामने आई थी, जिनके खिलाफ दस्तावेज जुटाए गए हैं। इनमें से पांच लोगों के मामले में फर्जी डिग्री और उसके आधार पर प्राप्त पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग और पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल को सौंपे गए हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री को भी पत्र भेजा गया है।
एसोसिएशन ने विवादित मेडिकल डिग्री और पंजीकरण की विस्तृत जांच कराने, चिकित्सकीय लापरवाही और मरीजों की मौत के मामलों की जांच करने तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत किए गए भुगतान की समीक्षा करने की मांग की है। संगठन ने गलत तरीके से प्राप्त धनराशि की वसूली, संबंधित चिकित्सकों का पंजीकरण रद्द करने और दोष साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई की भी मांग की है।
एसोसिएशन का आरोप है कि पांच आरोपितों में से दो नगर निकायों द्वारा संचालित क्लीनिकों में कार्यरत थे, जबकि एक व्यक्ति सरकारी डॉक्टर के तौर पर काम कर रहा था। संगठन ने आशंका जताई है कि यह मामला दूसरे राज्यों से फर्जी एमबीबीएस और स्नातकोत्तर मेडिकल डिग्री हासिल कर पश्चिम बंगाल में पंजीकरण कराने वाले किसी बड़े गिरोह की ओर इशारा कर सकता है। संभावित अवैध वित्तीय लेनदेन की भी जांच की मांग की गई है।
एसोसिएशन ने राज्यभर में डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल पंजीकरण का सत्यापन करने के लिए एक व्यापक तंत्र विकसित करने तथा संदिग्ध फर्जी प्रमाणपत्रों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन शुरू करने की मांग की है।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स के पूर्व महासचिव मानस गुमटा ने आरोपों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
वेस्ट बंगाल डॉक्टर्स फोरम के अध्यक्ष कौशिक चाकी ने कहा कि आरोप सही साबित होने पर इसके सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि किसी डॉक्टर के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पूर्व पंजीकरण का सत्यापन करना मेडिकल काउंसिल की मूल जिम्मेदारी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जा सकता।
सर्विस डॉक्टर्स फोरम के महासचिव सजल विश्वास ने कहा कि फर्जी या अवैध पंजीकरण संख्या के आधार पर चिकित्सा करना बेहद गंभीर अपराध है। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों के कारण कई लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है, जिससे पूरे चिकित्सा पेशे की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

