पूर्व डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास पर तबादला अनियमितताओं की जांच शुरू
कोलकाता, 15 जुलाई (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व कोलकाता पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ पुलिस अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन को प्रभावित कर कथित रूप से अर्जित की गई आय की अलग से जांच बुधवार से शुरू कर दी है। यह जांच करीब करोड़ रुपये की भूमि हड़पने के मामले में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर पहले से जारी धनशोधन जांच के अतिरिक्त है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ अनुपूरक आरोपपत्र भी दायर किया है।
मामले से अवगत सूत्रों के अनुसार, ईडी अधिकारियों ने यह नई जांच उन विशिष्ट शिकायतों के आधार पर प्रारंभ की है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि शांतनु सिन्हा विश्वास ने अपने से कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारियों, विशेषकर उपनिरीक्षक, निरीक्षक तथा सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों के तबादलों और पदस्थापनों को प्रभावित किया था।
सूत्रों के अनुसार, ईडी इस मामले की दो प्रमुख पहलुओं से जांच कर रही है। पहला, यह है कि क्या अपने विश्वस्त अधिकारियों को पसंदीदा थानों और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर शांतनु सिन्हा विश्वास ने कथित करीब करोड़ रुपये की भूमि कब्जा और अचल संपत्ति गिरोह पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया था। दूसरा, यह आकलन किया जा रहा है कि अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लाभप्रद और महत्वपूर्ण पदस्थापन दिलाने के एवज में उन्होंने कथित रूप से कितनी धनराशि कमीशन के रूप में अर्जित की।
केंद्रीय एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के अतिरिक्त यह मामला प्रशासनिक अधिकारों के कथित दुरुपयोग से भी जुड़ा हुआ है। जांच अधिकारियों ने अब तक अनेक दस्तावेज, बैंक लेन-देन संबंधी सूचनाएं, डिजिटल साक्ष्य तथा विभिन्न व्यक्तियों के बयान एकत्र किए हैं। इनकी समीक्षा के माध्यम से पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
गत सप्ताह ईडी ने शांतनु सिन्हा विश्वास, कथित भू-माफिया विश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू तथा रियल एस्टेट प्रवर्तक जय कामदार के विरुद्ध अवैध भूमि कब्जा मामले में अनुपूरक आरोपपत्र दायर किया था।
ईडी का आरोप है कि पूर्व डीसीपी तथा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले शांतनु सिन्हा विश्वास ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए भूमि एवं संपत्ति के मूल मालिकों पर दबाव बनाया और उन्हें रियल एस्टेट विकास के लिए अत्यंत कम कीमत पर अपनी जमीन अथवा संपत्ति बेचने के लिए बाध्य किया।
ईडी की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित अवैध भूमि कब्जा प्रकरण से शांतनु सिन्हा विश्वास को व्यक्तिगत रूप से लगभग तीन करोड़ रुपये का वित्तीय लाभ प्राप्त हुआ। सूत्रों के अनुसार, अनुपूरक आरोपपत्र में यह भी दावा किया गया है कि सोना पप्पू, जय कामदार और शांतनु सिन्हा विश्वास कथित रूप से मिलकर भूमि पर अवैध कब्जा करने की साजिश रचते थे।
केंद्रीय एजेंसी अब तबादला-पदस्थापन और भूमि कारोबार के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है तथा इस पूरे कथित नेटवर्क के वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

