वित्तीय सुधार की दिशा में ईसीएल की बड़ी पहल
पश्चिम बर्दवान, 04 सितंबर (हि. स.)। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने परिचालन और वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने की घोषणा की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2034-35 तक 81 मिलियन टन कोयला उत्पादन का दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है। ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने सांकतोड़िया स्थित मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कंपनी के भविष्य के रोडमैप और वर्तमान वित्तीय स्थिति की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईसीएल ने अब तक का सर्वाधिक 52.085 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, हालांकि इसी अवधि में कंपनी को करीब एक हजार 257 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी ने कर-पूर्व लाभ की स्थिति हासिल कर वित्तीय सुधार के संकेत दिए हैं।
वर्तमान में ईसीएल की 57 खदानें घाटे में, जबकि 20 खदानें लाभप्रद स्थिति में संचालित हो रही हैं। स्थिति सुधारने के लिए 19 खदानों में आधुनिक उत्पादन तकनीक, सात खदानों के एकीकरण, चार खदानों में नए अनुबंध, 11 खदानों की रणनीतिक बंदी और अन्य खदानों में लागत नियंत्रण की योजना पर काम किया जा रहा है।
रानीगंज पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के तहत 138 स्थलों की पहचान की गई है और इस कार्य के लिए करीब दो हजार 661 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सीएमडी ने विद्युत चोरी को भी कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बताया। ईसीएल का वार्षिक बिजली खर्च करीब 550 करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग 250 करोड़ रुपये की क्षति बिजली चोरी और अवैध उपयोग के कारण होने की बात कही गई।
अवैध खनन रोकने के लिए ईसीएल द्वारा ड्रोन निगरानी और एकीकृत कमांड एवं नियंत्रण केंद्र जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। वहीं, वैज्ञानिक खदान बंदी, पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन पद्धतियों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
ईसीएल प्रबंधन का कहना है कि कंपनी का भविष्य परिचालन दक्षता, वित्तीय अनुशासन, तकनीकी नवाचार, कर्मचारी सहभागिता और प्रभावित लोगों के जिम्मेदार पुनर्वास पर आधारित होगा। कंपनी ने 2034-35 तक 81 मिलियन टन उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

