सांकतोड़िया में भूमिगत कोयला गैसीकरण पर कार्यशील मॉडल का उद्घाटन
पश्चिम बर्दवान, 16 जून (हि. स.)। उन्नत कोयला उपयोग तकनीक को बढ़ावा देने और भविष्य की ऊर्जा समाधानों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) में भूमिगत कोयला गैसीकरण (अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन–यूसीजी) तथा इसके डाउनस्ट्रीम उपयोग पर आधारित एक कार्यशील प्रदर्शन मॉडल का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा ने किया।
इस अवसर पर ईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) गुंजन कुमार सिन्हा सहित कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष और कर्मचारी उपस्थित रहे। यह मॉडल भूमिगत कोयला गैसीकरण तकनीक के वैज्ञानिक सिद्धांत, संचालन प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाओं को सरल और दृश्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करता है।
यह तकनीक वर्तमान में झारखंड के कास्ता वेस्ट कोल ब्लॉक में एक पायलट परियोजना के रूप में लागू की जा रही है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएमडी ने कहा कि भूमिगत कोयला गैसीकरण भारत में सतत कोयला उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। उनके अनुसार यह तकनीक गहराई में मौजूद उन कोयला भंडारों के उपयोग की क्षमता रखती है, जिन्हें पारंपरिक खनन पद्धतियों से निकालना कठिन है।
उन्होंने कहा कि यदि पायलट परियोजना सफल रहती है तो इससे देश के कोयला संसाधनों के अधिक स्वच्छ और दक्ष उपयोग का मार्ग खुलेगा। यह तकनीक भविष्य में बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, रासायनिक उद्योग, कृत्रिम ईंधन तथा हाइड्रोजन आधारित ऊर्जा क्षेत्र के विकास में भी योगदान दे सकती है।
प्रदर्शन मॉडल में भूमिगत कोयला गैसीकरण की पूरी प्रक्रिया, सिंथेटिक गैस (सिंगैस) का उत्पादन और उसके विभिन्न औद्योगिक उपयोगों को दर्शाया गया है। साथ ही, इसमें इस तकनीक के संभावित लाभ जैसे कम सतही हस्तक्षेप, परिचालन जोखिमों में कमी तथा गहरे कोयला भंडारों के बेहतर उपयोग को भी प्रस्तुत किया गया।
यह परियोजना कोल इंडिया लिमिटेड की अनुसंधान एवं विकास पहल के अंतर्गत संयुक्त रूप से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सीएमपीडीआई द्वारा संचालित की जा रही है, जबकि कनाडा स्थित एग्रो एनर्जी टेक्नोलॉजीज आईएनसी तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।
परियोजना का उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों में यूसीजी तकनीक की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन कर भविष्य में इसके व्यावसायिक उपयोग का मार्ग तैयार करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

