हाईवे और प्रमुख सड़कों पर टोटो चलाने पर सख्ती, परिवहन विभाग ने पुलिस को दिए निर्देश
कोलकाता , 08 अगस्त (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल में सड़कों पर बढ़ते टोटो यानी ई-रिक्शा के दबाव और उससे पैदा होने वाली यातायात संबंधी समस्याओं को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब इनके संचालन को लेकर सख्ती का निर्देश दिया है। शनिवार को परिवहन विभाग ने पुलिस को निर्देश जारी कर नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन पर पहले से लागू प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने को कहा है।
परिवहन विभाग के प्रधान सचिव रवि इंदर सिंह ने पुलिस को भेजे पत्र में कहा है कि ई-रिक्शा का मूल उद्देश्य मुख्य परिवहन मार्गों पर लंबी दूरी की सेवा देना नहीं, बल्कि ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ उपलब्ध कराना है। यानी मोहल्लों और स्थानीय इलाकों से लोगों को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा अन्य सार्वजनिक परिवहन केंद्रों तक पहुंचाने में इनका इस्तेमाल होना चाहिए।
विभाग के मुताबिक, उसे लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई इलाकों में टोटो निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों पर चल रहे हैं। इससे प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है और जाम की स्थिति पैदा हो रही है। साथ ही धीमी गति से चलने वाले ई-रिक्शा और तेज रफ्तार वाहनों के एक ही मार्ग पर चलने से सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
परिवहन विभाग की मौजूदा दिशा के पीछे मुख्य उद्देश्य टोटो को उनकी मूल भूमिका तक सीमित रखना है। हाल में विभाग की ओर से टोटो संचालन को लिंक रोड और फीडर रोड तक सीमित करने की योजना पर भी जोर दिया गया है। इन सड़कों के माध्यम से यात्रियों को आसपास के इलाकों से बस कॉरिडोर, रेलवे स्टेशन और दूसरे सार्वजनिक परिवहन केंद्रों तक पहुंचाया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य टोटो को बस या अन्य अधिक क्षमता वाले सार्वजनिक परिवहन का विकल्प बनाने के बजाय उसका पूरक साधन बनाए रखना है। इससे एक तरफ स्थानीय लोगों को छोटी दूरी के आवागमन की सुविधा मिलती रहेगी, वहीं दूसरी तरफ मुख्य सड़कों पर अनावश्यक यातायात दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में प्रमुख हाईवे और महत्वपूर्ण सड़कों पर ऑटो-रिक्शा के संचालन को लेकर पहले से प्रतिबंधात्मक प्रावधान रहे हैं। राज्य परिवहन विभाग की पुरानी गाइडलाइन में भी नेशनल हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण हाईवे/सड़कों पर ऑटो के संचालन की अनुमति नहीं देने तथा परमिट में संचालन क्षेत्र स्पष्ट रूप से दर्ज करने का प्रावधान किया गया था।
अब परिवहन विभाग ने पुलिस से इन प्रतिबंधों को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराने को कहा है। इसका सीधा असर उन टोटो चालकों पर पड़ सकता है जो स्थानीय गलियों या लिंक रोड के बजाय मुख्य सड़क और हाईवे के जरिए लंबी दूरी की यात्रा कराते हैं।
इस निर्देश के बाद टोटो के संचालन का मुख्य फोकस स्थानीय और छोटी दूरी की यात्राओं पर रखने की कोशिश होगी। उदाहरण के तौर पर किसी मोहल्ले से स्टेशन, बस स्टैंड या मुख्य सड़क तक पहुंचाने में टोटो की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन मुख्य हाईवे या बड़े यातायात मार्ग पर लंबे समय तक चलने पर कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा नियमों को किस तरह लागू किया जाता है, इस पर निर्भर करेगा। परिवहन विभाग की वेबसाइट पर राज्य के परिवहन संबंधी नियम, परमिट और अन्य दिशानिर्देश उपलब्ध हैं।
आसनसोल, दुर्गापुर, सिलीगुड़ी समेत राज्य के कई शहरों में टोटो स्थानीय परिवहन का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। ऐसे में मुख्य सड़कों और हाईवे पर इनके संचालन को लेकर लिया गया यह निर्देश स्थानीय यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर उन इलाकों में जहां मुख्य सड़क पर टोटो, बस, ट्रक, ऑटो और निजी वाहनों की आवाजाही एक साथ होने से जाम की समस्या बनी रहती है।
फिलहाल परिवहन विभाग ने पुलिस को मौजूदा प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया है। आने वाले दिनों में प्रमुख सड़कों पर टोटो के संचालन को लेकर जांच और कार्रवाई बढ़ने की संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

