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कोहरे की चादर से ढका शिल्पांचल

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कोहरे की चादर से ढका शिल्पांचल


दुर्गापुर, 19 सितंबर (हि.स.)।

आमतौर पर कोहरे और धुंध की तस्वीर सर्दियों के दौरान देखने को मिलती है, लेकिन इस बार सितंबर के मध्य में ही दुर्गापुर सिटी सेंटर समेत कई इलाकों और नेशनल हाईवे-19 के आसपास धुंध की मोटी परत देखने को मिली। सुबह के समय कई जगहों पर दृश्यता प्रभावित हुई और पूरा औद्योगिक इलाका धुंध की चादर में लिपटा नजर आया।

हालांकि, इस धुंध को सीधे तौर पर केवल प्रदूषण से बना ‘स्मॉग’ कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। 19 सितंबर की सुबह दुर्गापुर में आर्द्रता करीब 99 प्रतिशत और हवा की गति लगभग एक किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई। अधिक नमी और बेहद कम हवा की गति जमीन के करीब नमी के संघनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती हैं, जिससे धुंध या कोहरा बन सकता है।

लेकिन दुर्गापुर की औद्योगिक स्थिति को देखते हुए प्रदूषण की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2026 में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में दुर्गापुर-आसनसोल-रानीगंज औद्योगिक कॉरिडोर में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर का अध्ययन किया गया। इसमें उद्योग और परिवहन को स्थानीय प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल किया गया है। अध्ययन के अनुसार औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में पार्टिकुलेट मैटर का स्तर अधिक पाया गया।

दुर्गापुर के क्लीन एयर एक्शन प्लान में भी 2018 के उत्सर्जन आकलन का हवाला देते हुए बताया गया है कि आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र में पीएम 2.5 के लिए औद्योगिक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक था। इसके बाद धूल, ईंट भट्ठे, परिवहन और घरेलू स्रोतों का योगदान दर्ज किया गया था।

वैज्ञानिक तौर पर कोहरा मुख्य रूप से पानी की सूक्ष्म बूंदों से बनता है, जबकि स्मॉग में प्रदूषक कण और गैसें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हवा में नमी बहुत अधिक और हवा की गति कम होती है, तो वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण पानी की बूंदों के बनने के लिए ‘कंडेंसेशन न्यूक्लिआइ’ का काम कर सकते हैं। इससे धुंध कुछ परिस्थितियों में अधिक घनी और लंबे समय तक बनी रह सकती है।

दुर्गापुर-आसनसोल बेल्ट में भारी उद्योग, कोयला आधारित गतिविधियां, बिजली संयंत्र, स्पंज आयरन, इस्पात, सीमेंट, ईंट भट्ठे और भारी वाहनों की मौजूदगी है। ऐसे औद्योगिक क्षेत्र में जब हवा की गति कम और वायुमंडलीय मिश्रण कमजोर हो, तो उत्सर्जित कण जमीन के करीब बने रह सकते हैं। इससे सुबह के समय धुंध और प्रदूषण का प्रभाव एक साथ दिखाई देने की संभावना बढ़ जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा