हाईकोर्ट के स्थगनादेश की अवहेलना का आरोप, दुर्गापुर में 250 ठेका श्रमिकों का प्रदर्शन
दुर्गापुर, 03 नवंबर (हि. स.)। कलकता हाईकोर्ट के स्थगनादेश के बावजूद काम से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए दुर्गापुर इस्पात कारखाना (डीएसपी) और फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) के करीब 250 ठेका श्रमिकों ने मंगलवार को कारखाने के मुख्य गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। श्रमिकों का आरोप है कि अदालत के निर्देश के बावजूद उनके गेट पास रद्द कर दिए गए और उनकी जगह नए सिरे से टेंडर (निविदा) जारी कर दूसरे श्रमिकों को काम पर लगाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने मांग की कि उन्हें तत्काल काम पर वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अपने परिवार के साथ कोई कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। श्रमिकों ने इस मामले में राष्ट्रपति के समक्ष भी अपनी फरियाद रखने की बात कही।
श्रमिकों का कहना है कि पिछले एक अक्टूबर से करीब 250 ठेका कर्मचारियों के गेट पास छीनकर उनका काम बंद करा दिया गया है। इसके खिलाफ श्रमिकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका दावा है कि अदालत ने उनके हितों की रक्षा करते हुए स्थगनादेश जारी किया था। इसके बावजूद डीएसपी प्रबंधन और एफएसएनएल की ओर से नए सिरे से टेंडर जारी कर दूसरे लोगों को काम पर रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल के अधीन दुर्गापुर इस्पात कारखाने में फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) एक सहयोगी इकाई के रूप में काम करती है। यह कंपनी इस्पात उत्पादन के दौरान निकलने वाले स्क्रैप और स्लैग से लोहे की रिकवरी तथा उसके पुनः उपयोग का काम करती है। हाल ही में निजीकरण के बाद एफएसएनएल का स्वामित्व जापान के कोनोइके ग्रुप के हाथों में चला गया है। श्रमिकों का आरोप है कि स्वामित्व हस्तांतरण के बाद ही उनके रोजगार पर संकट खड़ा हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से काम कर रहे श्रमिक रंजीत शर्मा ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्ष 1991 से इस विभाग में पूरी निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं। इस उम्र में अचानक उन्हें काम से बैठा दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के निर्देश की अनदेखी कर अवैध तरीके से नया टेंडर जारी किया गया है। अब उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि काम वापस नहीं मिला तो वे परिवार सहित कठोर कदम उठाने पर विचार करेंगे और राष्ट्रपति से न्याय की गुहार लगाएंगे।
श्रमिकों के समर्थन में उतरे सीटू (सीटू) नेता हराधन साईं ने डीएसपी प्रबंधन की भूमिका की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में श्रमिकों की रोजी-रोटी गैरकानूनी तरीके से नहीं छीनी जा सकती। हाईकोर्ट की ओर से श्रमिकों के पक्ष में स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रबंधन उसका पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो श्रमिक संगठन और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।
वहीं, हाईकोर्ट के स्थगनादेश की कथित अवहेलना और श्रमिकों के प्रदर्शन को लेकर डीएसपी प्रबंधन तथा एफएसएनएल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा

