पूजा में डीजे की जगह ढाक की बढ़ी मांग, कलाकारों को राहत
मेदिनीपुर, 08 अक्टूबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में पूजा के दौरान डीजे और तेज आवाज वाले माइक पर सख्ती के बीच पारंपरिक ढाक की मांग बढ़ गई है। पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर जिले के ढाक कलाकारों के साथ वाद्य यंत्र विक्रेताओं को भी इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद बढ़ी है। पूजा समितियां डीजे के बजाय पारंपरिक ढाक की ओर रुख कर रही हैं, जिससे ढाक कलाकारों के बीच उत्साह है।
पूर्व मेदिनीपुर के शहीद मातंगिनी ब्लॉक के महिषदा, काखदा, बामनआड़ा सहित कई गांवों में बड़ी संख्या में ढाक कलाकार रहते हैं। पूजा से पहले इन गांवों में इन दिनों काफी व्यस्तता है। कोई ढाक की मरम्मत कर रहा है तो कोई उसकी चमड़ी कसकर सुर ठीक कर रहा है। कलाकारों के अनुसार, इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक एडवांस मिल रहा है।
महिषदा गांव के ढाक कलाकार स्वरूप डुलाई ने बताया कि इस बार ढाक और बैंड पार्टी की मांग बढ़ी है। संभवतः डीजे बजाने पर रोक के कारण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इतनी अधिक बुकिंग आ रही है कि कलाकारों की कमी के कारण कई जगहों की बुकिंग स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
पश्चिम मेदिनीपुर के ढाक वादक किंकर सिंह ने गुरुवार सुबह एक पूजा कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्थान समाचार को बताया कि डीजे के बढ़ते चलन से उनके कारोबार के साथ पूजा के भक्ति रस में भी कमी आई थी। उन्होंने कहा कि अब डीजे पर रोक के बाद पूजा पंडालों की समितियां फिर से ढाक की ओर बढ़ रही हैं। यह कलाकारों के लिए अच्छी बात है और हमारी सांस्कृतिक परंपरा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कलाकारों के अनुसार, केवल पूर्व मेदिनीपुर ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों और दूसरे राज्यों से भी बुकिंग मिल रही है। कोलकाता, खड़गपुर, टाटा और जमशेदपुर के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी बायना आया है। गांव के कई कलाकार पूजा के दौरान दूसरे राज्यों में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
मेदिनीपुर के ढाक कलाकार अतुल पालूई ने बताया कि बुकिंग बढ़ने के साथ तैयारियां भी तेज हो गई हैं। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद अब पूजा सामने है। इसलिए ढाक की चमड़ी, बांधने की व्यवस्था और अन्य सामान को अच्छी तरह जांचा जा रहा है, ताकि पूजा के दौरान कोई परेशानी न हो।
झाड़ग्राम के सुर संगम वाद्य यंत्र विक्रेता सुदीप ने बताया कि वन क्षेत्र में पारंपरिक रूप से पूजा के दौरान ढाक का ही इस्तेमाल होता रहा है। हालांकि बीच के वर्षों में डीजे के बढ़ते चलन से ढाक और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का कारोबार कमजोर हुआ था। इस बार स्थिति काफी बेहतर है और ढाक सहित पारंपरिक वाद्य यंत्रों को लेकर अच्छा रुझान देखने को मिल रहा है।
मांग बढ़ने के बावजूद कलाकारों की संख्या सीमित होने से कई पूजा समितियों को परेशानी हो रही है। पहले स्थानीय स्तर पर आसानी से ढाक और बैंड पार्टी मिल जाती थी, लेकिन इस बार कई समितियों को जिले से बाहर संपर्क करना पड़ रहा है।
नारायणगढ़ की सार्वजनिन पूजा समिति के सचिव राजीव सेन ने बताया कि हर साल पूजा के लिए ढाक कलाकारों की बुकिंग की जाती है, लेकिन इस बार स्थानीय स्तर पर दल नहीं मिल रहा है। इसलिए झाड़ग्राम की एक टीम से संपर्क किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

