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दुर्गा' और 'दिव्या' की बदौलत कोलकाता मेट्रो की नई लाइन पर भूमिगत टनल खुदाई का चुनौती पूर्ण कार्य संपन्न

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दुर्गा' और 'दिव्या' की बदौलत कोलकाता मेट्रो की नई लाइन पर भूमिगत टनल खुदाई का चुनौती पूर्ण कार्य संपन्न


कर्मियों और अधिकारियों में खुशी की लहर

कोलकाता, 11 अगस्त (हि. स.)। कोलकाता के जोका-एस्प्लेनेड मेट्रो प्रोजेक्ट ने मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। मेट्रो सुरंग निर्माण में लगी विशाल टनल बोरिंग मशीन ‘दिव्या’ ने एक हजार 740 मीटर लंबी सुरंग बनाने का काम पूरा कर विक्टोरिया मेमोरियल के पास जमीन से बाहर निकलकर अपना सफर समाप्त किया।

‘दिव्या’ के बाहर निकलने के ऐतिहासिक क्षण के दौरान मेट्रो रेल के अधिकारी, इंजीनियर और निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। दिव्या के बाहर आते ही कर्मचारियों और अधिकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने मशीन के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

उल्लेखनीय हैं कि भूमिगत सुरंग बनाने की जिम्मेदारी दो विशाल टनल बोरिंग मशीनों ‘दुर्गा’ और ‘दिव्या’ को सौंपी गई थी। मेट्रो के अधिकारी और कर्मचारी इन दोनों मशीनों को प्यार से ‘दो बहनें’ कहा करते हैं। दोनों मशीनों ने जमीन के नीचे सुरंग बनाने का चुनौतीपूर्ण काम शुरू किया था।

इस परियोजना के तहत घनी आबादी वाले महानगर के नीचे से सुरंग तैयार की जा रही है। इलाके में भूमिगत जल समेत कई तकनीकी चुनौतियां मौजूद थीं। ऐसे में जमीन के ऊपर सामान्य जनजीवन और निर्माण कार्यों को प्रभावित किए बिना सुरंग बनाने का काम किया गया।

पिछले जुलाई में पहली सुरंग का काम पूरा कर ‘दुर्गा’ विक्टोरिया मेमोरियल के पास बाहर निकली थी। उस समय दूसरी सुरंग का काम ‘दिव्या’ के जरिए जारी था। मंगलवार को दिव्या के भी बाहर निकलने के साथ दोनों सुरंगों का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया।

कोलकाता मेट्रो के महाप्रबंधक प्रेमसागर गुप्ता ने इसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि दिव्या ने मंगलवार को अपना सफर पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस बात की खुशी है कि बिना किसी नुकसान के काम पूरा किया गया।

दिव्या ने 11 अक्टूबर 2025 को अपना काम शुरू किया था और करीब 10 महीने में एक हजार740 मीटर लंबी सुरंग बनाने का काम पूरा किया।

जोक़ा-एस्प्लेनेड मेट्रो परियोजना के पूरा होने के बाद दक्षिणी उपनगरों को पश्चिम और मध्य कोलकाता से मेट्रो नेटवर्क के जरिए जोड़ा जा सकेगा। परियोजना के 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके पूरा होने से कोलकाता के सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को नई गति मिलने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय