दिनहाटा में मतदान से पहले हिंसा की आशंका, मतदाताओं की चिंता बढ़ी
कोलकाता, 27 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले की दिनहाटा और सितलकुची विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक हिंसा को लेकर मतदाताओं की चिंता लगातार बनी हुई है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इन दोनों क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव का लंबा इतिहास रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां छोटी-मोटी राजनीतिक तनातनी भी कभी-कभी बड़े हिंसक टकराव में बदल जाती है, जिससे आम मतदाता भय के माहौल में जी रहे हैं।
दिनहाटा में वर्तमान विधायक उदयन गुहा इस बार अपने चुनाव प्रचार में विकास के मुद्दों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं और आक्रामक बयानबाजी से बचते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इसका एक कारण भाजपा के उम्मीदवार अजय रॉय के साथ अपेक्षाकृत आसान मुकाबला भी हो सकता है, क्योंकि इस बार उनका सामना उनके पुराने प्रतिद्वंद्वी निशीथ प्रमाणिक से नहीं है।
तीन बार के विधायक उदयन गुहा 2021 का चुनाव मामूली अंतर से हार गए थे, लेकिन बाद में उपचुनाव में बड़ी जीत के साथ उन्होंने सीट दोबारा हासिल कर ली थी। यह उपचुनाव उस समय हुआ था जब निशीथ प्रमाणिक ने केंद्रीय सरकार में शामिल होने के बाद सीट खाली कर दी थी।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कई बार हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान भी झड़पें हुई थीं, जबकि 2025 में कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं भी दर्ज की गई थीं।
इस बीच मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी असंतोष देखा जा रहा है। खासकर 2015 के भूमि सीमा समझौते के बाद भारत में शामिल हुए पूर्व एन्क्लेव क्षेत्रों के हजारों लोगों के मतदाता दर्जे को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई नाम या तो सूची से हटा दिए गए हैं या जांच के दायरे में रखे गए हैं, जिससे मतदान से पहले मताधिकार छिनने की आशंका पैदा हो गई है। प्रभावित लोगों में से कई ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अदालत का रुख कर सकते हैं।
वहीं, पड़ोसी सितलकुची सीट पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के दिन हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत के बाद यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। इनमें चार लोगों की मौत सुरक्षा बलों की गोलीबारी में हुई थी।
पिछले चुनाव में भाजपा के बरेन चंद्र बर्मन ने तृणमूल कांग्रेस के पार्थ प्रतिम राय को हराकर यह सीट जीती थी।
इस बार तृणमूल कांग्रेस ने हरिहर दास को उम्मीदवार बनाया है, जिनकी उम्मीदवारी को क्षेत्र के प्रभावशाली व्यक्ति अनंत महाराज से उनकी नजदीकी के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक की जगह सावित्री बर्मन को उम्मीदवार बनाकर नया चेहरा उतारा है।
हिंसा के इतिहास, बदलते राजनीतिक समीकरण और मतदाता सूची विवाद के बीच दिनहाटा और सितलकुची दोनों सीटों पर इस बार कड़ी नजर रखी जा रही है। यहां मतदाताओं के बीच सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव को लेकर चिंता प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

