चुनाव 26 : खड़गपुर में दिलीप घोष का भरोसा, रिकॉर्ड जीत का किया दावा
खड़गपुर, 09 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मजबूत विपक्षी रूप देने में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की भूमिका अहम मानी जाती है। संगठन और राजनीतिक कौशल के दम पर उन्होंने पार्टी को मामूली मौजूदगी से प्रमुख विपक्षी शक्ति में बदल दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनका नाता बचपन से रहा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े घोष ने गोपिबल्लभपुर स्थित बाबू डुमरो हाई स्कूल से 1980 में माध्यमिक परीक्षा पास की। इसके बाद 1984 में, मात्र 20 वर्ष की आयु में वे संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। उन्होंने अपने क्षेत्र के ग्रामीण और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में संगठन की पैठ मजबूत की और पूरे पश्चिम बंगाल में संघ पृष्ठभूमि द्वारा संचालित हर क्षेत्र में भिन्न-भिन्न दायित्व के साथ लगातार जमीनी स्तर पर काम किया।
दिलीप घोष ने दिसंबर 2015 में पार्टी की कमान संभाली, जब संगठन आंतरिक चुनौतियों और कमजोर आधार से जूझ रहा था। उन्होंने मंडल और जिला स्तर पर पदाधिकारियों का फेरबदल कर संगठन को सक्रिय किया। इसका परिणाम 2018 के पंचायत चुनावों में दिखा, जहां भाजपा ने लगभग 38 हजार से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे और ग्राम पंचायत की हजार 700 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। 2016 में खड़गपुर सदर सीट पर जीत और 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटों की सफलता ने बंगाल की राजनीति में नया ध्रुवीकरण पैदा किया। अंततः 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटों तक पहुंचने में सफल रही।
पार्टी के भीतर गुटबाजी के चलते 2024 में उनकी पश्चिम मेदिनीपुर सीट बदल दी गई और उन्हें बर्धमान से चुनाव लड़ाया गया, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा।यहीं से चुनाव लड़ रहीं अग्निमित्रा पॉल भी पराजित हो गईं। एक बार फिर 2026 के चुनाव में पार्टी ने घोष को खड़गपुर सदर से उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने इस क्षेत्र में जनता से सीधे संपर्क बढ़ाकर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
गुरुवार सुबह उन्होंने हिंदुस्थान समाचार से बात करते हुए कहा कि इस बार वे खड़गपुर सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करेंगे। उनका कहना है कि जनता में तृणमूल कांग्रेस को लेकर भय का माहौल है और भाजपा के 300 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। इस बार जनता पूरी तरह बदलाव के मूड में है।
दिलीप घोष ने बताया कि वे रोज सुबह प्रातः भ्रमण के दौरान आम लोगों से मिलते हैं और उनकी समस्याएं सीधे सुनते हैं। उन्होंने कहा कि वे विरोधियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। घोष के अनुसार, इस बार उनका लक्ष्य सांसद निधि और सीएसआर फंड के माध्यम से विकास कार्यों को गति देकर “नए खड़गपुर” का निर्माण करना है।
उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में शहर को माफिया और भ्रष्टाचार से मुक्त करना, आधुनिक जल निकासी व्यवस्था विकसित करना, स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त वातावरण बनाना, हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना, युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाना, सड़कों की स्थिति सुधारना, महिलाओं के सम्मान और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा करना तथा खड़गपुर की विविध संस्कृति को संरक्षित रखना शामिल है।
घोष ने कहा कि वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता से समर्थन और आशीर्वाद की अपील कर रहे हैं। उनका संदेश स्पष्ट है—“बदलाव की ज़रूरत” और “भाजपा सरकार”। उन्होंने कहा कि उनकी रणनीति जनसंपर्क बढ़ाने, संगठन को और मजबूत करने तथा आम लोगों की समस्याओं पर सीधे ध्यान देने पर आधारित है।उन्होंने विश्वास जताया कि खड़गपुर में उनका अभियान पहले से अधिक ऊर्जावान हो चुका है और उन्हें उम्मीद है कि जनता का समर्थन उन्हें निर्णायक जीत दिलाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

