डबल इंजन सरकार से बंगाल में अटके रेल परियोजनाओं पूरे होने की उम्मीद
कोलकाता, 06 मई (हि. स.)। विधानसभा चुनाव में श्री सरकार बनने की तैयारी के बीच पश्चिम बंगाल में लंबे समय से अटके कई रेल परियोजनाओं के पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि राज्य में अब ‘डबल इंजन’ सरकार बनने के बाद भूमि अधिग्रहण की समस्या दूर हो सकती है और परियोजनाओं को गति मिल सकती है।
रेलवे के अनुसार राज्य में करीब 68 हजार करोड़ रुपये की लागत से 42 रेल परियोजनाओं की घोषणा की गई है। लेकिन इन परियोजनाओं के लिए आवश्यक जमीन का केवल 27 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक रेलवे को मिल पाया है। करीब 73 प्रतिशत जमीन का अधिग्रहण लंबे समय से अटका हुआ है, जिसकी कुल मात्रा लगभग चार हज़ार 662 हेक्टेयर है।
सबसे प्रमुख परियोजनाओं में कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन (कवि सुभाष से एयरपोर्ट) का निर्माण भी शामिल है। चिंग्ड़ीघाटा इलाके में करीब 377 मीटर हिस्से में पिलर नहीं लग पाने के कारण यह काम लंबे समय से रुका हुआ है। रेलवे अधिकारियों का आरोप है कि कई बार ट्रैफिक ब्लॉक लेकर काम शुरू करने की कोशिश की गई, लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिली।
इसके अलावा तारकेश्वर–बिष्णुपुर (83 किमी) रेल परियोजना का काम भी जमीन विवाद के कारण रुका हुआ है। गोघाट–कामारपुकुर हिस्से में 2016 से स्थानीय आंदोलन के कारण निर्माण कार्य बंद है। वहीं देशप्राण–नंदीग्राम (18.5 किमी) रेल परियोजना का काम भी 2009-10 से जमीन अधिग्रहण की समस्या में फंसा हुआ है।
नैहाटी और रानाघाट के बीच तीसरी रेल लाइन का काम भी भूमि समस्या के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यह शाखा बहुत व्यस्त माना जाता है और ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए तीसरी लाइन जरूरी है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार चांडिल–अनारा–बर्नपुर शाखा में तीसरी लाइन और जलेश्वर से दीघा तक नई रेल लाइन बिछाने का काम भी जमीन के कारण अटका है। नवद्वीप घाट से नवद्वीप धाम तक रेल लाइन बनाने की परियोजना भी लंबे समय से अधूरी है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित रेलवे बोर्ड के कई अधिकारियों ने पहले आरोप लगाया था कि राज्य सरकार के विरोध के कारण इन परियोजनाओं के लिए जमीन नहीं मिल पा रही थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता

