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15 दिन बाद खुले दीघा जगन्नाथ मंदिर के कपाट, रथयात्रा की तैयारी पूर्ण

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15 दिन बाद खुले दीघा जगन्नाथ मंदिर के कपाट, रथयात्रा की तैयारी पूर्ण


मेदिनीपुर, 15 जुलाई (हि. स.)। स्नान यात्रा के बाद 15 दिनों के अनवसर पर्व की समाप्ति पर बुधवार को दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के कपाट पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। प्रातः छह बजे मंदिर के द्वार खुलते ही भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के नवयौवन रूप के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

गुरुवार को होने वाली रथयात्रा को लेकर दीघा जगन्नाथ मंदिर में व्यापक तैयारियां चल रही हैं। समुद्र तटीय नगर में पहले से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के अनुसार रथयात्रा के दिन लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के तीनों रथों को सजाने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

दीघा जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट तथा प्रधान पुजारी राधारमण दास ने कहा कि अनवसर के 15 दिनों के बाद भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के पुनः दर्शन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आनंद और भावनात्मक क्षण है। उन्होंने सभी भक्तों से ऐतिहासिक दीघा रथयात्रा में शामिल होने का आह्वान किया।

राज्य में राजनीतिक परिवर्तन के बाद इस वर्ष दीघा की रथयात्रा में कुछ विशेष बदलाव भी देखने को मिल रहे हैं। पिछले वर्ष दीघा मंदिर की पहली रथयात्रा का शुभारंभ तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की। इस बार राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद रथयात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पिता तथा कांथी के पूर्व सांसद शिशिर अधिकारी उपस्थित रहेंगे। वही इस बार रथ की रस्सी पर प्रथम खीचेंगे। मंदिर समिति की ओर से उत्सव का विस्तृत कार्यक्रम भी घोषित कर दिया गया है।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार प्रातः साढ़े दस बजे रथयात्रा उत्सव का शुभारंभ होगा। इसके बाद गर्भगृह से भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा को तीनों रथों पर विराजमान कराया जाएगा। दोपहर एक बजे से ढाई बजे तक रथों को सजाया जाएगा तथा रथ पर विराजमान विग्रहों को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। दोपहर तीन बजे से साढ़े तीन बजे तक उद्घाटन समारोह आयोजित होगा और अपराह्न साढ़े तीन बजे शिशिर अधिकारी रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। अपराह्न साढ़े चार बजे तक रथों के गुंडिचा मंदिर, अर्थात मौसीबाड़ी, पहुंचने का कार्यक्रम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता