डूआर्स-तराई के लिए स्वशासित प्रशासन की मांग तेज
जलपाईगुड़ी, 03 अगस्त (हि. स.)। डूआर्स-तराई क्षेत्र के लिए आदिवासी टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (स्वशासित प्रशासन) की मांग को लेकर उत्तर बंग आदिवासी विकास परिषद ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। इस मुद्दे पर सोमवार को नागराकाटा में संगठन की स्टीयरिंग कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। संगठन के नेताओं ने बताया कि 24 जुलाई को ही इस मांग को लेकर राज्य सरकार को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है।
परिषद के संयोजक किरण कालिंदी ने कहा कि चाय बागान क्षेत्रों के आदिवासी समुदाय का विकास अब तक अधूरा है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर बनी हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रस्तावित अलग प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए ही आदिवासी समाज को वास्तविक विकास मिल सकता है।
परिषद ने पहाड़ों के स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि डूआर्स और तराई क्षेत्र के 446 आदिवासी बहुल मौजों में रहने वाले लगभग 50 लाख लोगों की समस्याओं का समाधान जरूरी है।
संगठन के वरिष्ठ नेता चंदन लोहार ने कहा कि इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईटीडीपी) के तहत पहले से ही 446 मौजों को चिन्हित किया गया है, लेकिन यहां के आदिवासियों की भाषा, संस्कृति, शिक्षा और आजीविका आज संकट में है। उन्होंने कहा कि असम में बोडो टेरिटोरियल काउंसिल और दार्जिलिंग पहाड़ में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन की तर्ज पर डूआर्स-तराई में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
बैठक में परिषद ने अन्य मांगों को भी प्रमुखता से उठाया। इनमें अगले छह महीनों के भीतर चाय बागान श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में लाने, आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाने, हर आदिवासी बहुल ब्लॉक में एक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित करने और अधिक से अधिक आदिवासी छात्रों को छात्रवृत्ति के दायरे में लाने की मांग शामिल है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार

