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‘सरकार बदली, लेकिन पहाड़ पर विकास अधूरा’, दिलीप घोष से मुलाकात में बिमल गुरुंग ने जताई नाराजगी

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‘सरकार बदली, लेकिन पहाड़ पर विकास अधूरा’, दिलीप घोष से मुलाकात में बिमल गुरुंग ने जताई नाराजगी


दार्जिलिंग, 29 अक्टूबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बावजूद पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं होने का आरोप लगाते हुए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग ने गुरुवार को राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की।

सूत्रों के अनुसार, दार्जिलिंग के सिंगमारी स्थित मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय में दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में दार्जिलिंग पहाड़, तराई और डुआर्स के समग्र विकास, आम लोगों के बुनियादी अधिकारों और लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय समस्याओं पर चर्चा हुई। बिमल गुरुंग ने कहा कि पहाड़ के ग्रामीण इलाकों की स्थिति अब भी चिंताजनक है।

उनके अनुसार, विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को अच्छी सड़कें, पेयजल और बुनियादी सरकारी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही हैं। गुरुंग ने मांग की कि राज्य सरकार बिना देरी किए पहाड़ के आम लोगों की दैनिक जरूरतों को प्राथमिकता दे और यह सुनिश्चित करे कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने पहाड़ के स्थायी राजनीतिक समाधान, जनहित की रक्षा और स्थानीय लोगों के आत्मसम्मान के लिए संघर्ष जारी रखने की बात भी कही।

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने गुरुंग की बातों को गंभीरता से सुनते हुए समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। दिलीप घोष ने कहा कि पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और लंबित विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार गंभीरता से विचार करेगी।

मंत्री ने संबंधित विभागों के तहत रुके हुए विकास कार्यों में तेजी लाने और नई योजनाओं को जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाने का भरोसा दिया। पहाड़ में स्थायी राजनीतिक समाधान के मुद्दे पर कभी भाजपा और गोजमुमो के बीच करीबी संबंध रहे हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

इधर, कर्सियांग, मिरिक और कालिम्पोंग नगरपालिकाओं के आगामी चुनावों से पहले पेयजल संकट, नागरिक सुविधाओं की कमी, जर्जर बुनियादी ढांचे और बेरोजगारी जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। ऐसे में सिंगमारी में हुई इस बैठक और विकास को लेकर दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। हालांकि, बैठक से किसी नए राजनीतिक गठबंधन या चुनावी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

राजनीतिक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार