महंगाई भत्ते को लेकर बंगाल में टकराव तेज, कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का किया ऐलान
कोलकाता, 21 फरवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ते के मुद्दे पर राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव तेज हो गया है। सत्तारूढ़ दल से जुड़े संगठन को छोड़कर अन्य कर्मचारी संगठनों ने विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के खिलाफ दोतरफा अभियान चलाने की घोषणा की है। इसमें एक ओर कानूनी लड़ाई जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर सड़क पर आंदोलन किया जाएगा।
राज्य सरकारी कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के संयुक्त मंच ‘संग्रामी संयुक्त मंच’ ने राज्य सरकार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की है। मंच का आरोप है कि न्यायालय के हालिया आदेश के बावजूद सरकार ने वर्ष 2008 से 2019 तक के बकाया महंगाई भत्ते का 25 प्रतिशत तत्काल और चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति से पहले भुगतान करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
दूसरी ओर, संयुक्त मंच से जुड़े संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित किया है। पश्चिम बंगाल समन्वय समिति, जो वाम दल समर्थित कर्मचारी संगठन है, ने 26 फरवरी को कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र से मुख्यमंत्री आवास कालीघाट के निकट तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है। संगठन के महासचिव बिस्वजीत गुप्ता चौधरी ने कहा कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सरकार भुगतान टालने का प्रयास कर रही है, इसलिए कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर भी आवाज बुलंद की जाएगी।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी से परहेज किया है और कहा है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हालांकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि जब उच्चतम न्यायालय आदेश दे चुका है तो इसे लंबित मामला बताना उचित नहीं है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, न्यायालय के आदेश को लागू करने पर राज्य सरकार को तत्काल लगभग दस हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ सकता है, यह राशि लगभग 42 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

